36 बरस के अखिलेश जौहरी गाजियाबाद में अपनी मां, पत्नी और दो बच्चों के साथ दो बेडरूम वाले एक फ्लैट में रहते हैं, जिसे उन्होंने 2013 में खरीदा था। वह 20 लाख रुपये होम लोन की किस्तें चुका रहे हैं। इसके अलावा 2018 में उन्होंने पांच लाख रुपये का जो कार लोन लिया था, उसकी किस्तें भी चुका रहे हैं। वह खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी ट्यूशन पढ़ाती हैं।

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36 बरस के अखिलेश जौहरी गाजियाबाद में अपनी मां, पत्नी और दो बच्चों के साथ दो बेडरूम वाले एक फ्लैट में रहते हैं, जिसे उन्होंने 2013 में खरीदा था। वह 20 लाख रुपये होम लोन की किस्तें चुका रहे हैं। इसके अलावा 2018 में उन्होंने पांच लाख रुपये का जो कार लोन लिया था, उसकी किस्तें भी चुका रहे हैं। वह खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी ट्यूशन पढ़ाती हैं।

हम जानते हैं कि ईएमआई (मासिक किस्तें) कर्जदार को कर्ज की बड़ी रकम को एक निश्चित अवधि के दौरान छोटे हिस्सों में चुकाने की सुविधा देती है। रिजर्व बैंक ने कड़े नियम बनाए हैं, जो सुनिश्चित करते हैं कि कर्जदार भुगतान करने की क्षमता से अधिक कर्जा न ले सके।
आप कितना कर्जा ले सकते हैं, वह आपकी आय पर निर्भर करता है। लेकिन आपके लिए सुझाव है कि कर्ज लेने से पहले आप यह सुनिश्चित करें कि कर्ज की किस्तें आपके घर ले जाने वाले वेतन के 40 फीसदी से अधिक न हो। अलग-अलग व्यक्तियों के लिए यह राशि अलग हो सकती है और कर्ज की अवधि भी, लेकिन इस आंकड़े को यहीं तक सीमित न रखें, तो आपको कर्ज भुगतान में मदद मिलेगी।
कोरोना महामारी के कारण लोगों की आय प्रभावित हुई है और भविष्य की आय को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसे देखते हुए सरकार ने कर्जदारों की मदद के लिए मोरेटोरियम यानी किस्त में छूट और लोन री-स्ट्रक्चरिंग की पेशकश की। इस बीच लॉकडाउन के चलते जौहरी की पत्नी का ट्यूशन भी बंद हो गया है।