कोटा में कोचिंग स्टूडेंट की आत्महत्याओं का सिलसिला रुकने का नाम नही ले रहा है।बीते एक सप्ताह में 4 स्टूडेंट्स ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मंत्री,सांसद, विधायक,जन प्रतिनिधि,प्रशासन,पुलिस ,कोचिंग संस्थान,होस्टल संचालक सब मोन है। प्रशासन ने गाइड लाइन जारी कर रक्खी है जो बेदम साबित हो रही है।

तड़प उसे होती है जिसका लाल जाता है। बाकी सब पल्ला झाड़ लेते हैं। कोचिंग संस्थान और होस्टल मालिकों को अपने मुनाफे से मतलब है, स्टूडेंट की सुरक्षा से कोई लेना देना नहीं। किये गए प्रयास और उपाय सब फैल हो रहे है। प्रशासन बैठक कर निर्देश जारी कर देता है, ज्यादा हुआ तो फोरी निरीक्षण कर इतिश्री कर लेता है।आज तक किसी संस्थान या होस्टल पर कोई जिम्मेदारी तय नहीं हुई और न ही किसी को कोई दंड दिया गया।

पहली बार नहीं वरन पहले भी स्टूडेंट्स की आत्महत्यों का लंबा सिलसिला चला पर जिम्मेदारी से सब मुक्त। आखिर कौन लेगा कोटा को करोड़ो रूपये देने वाले देश के कोने कोने से आने वाले इन बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी।

सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीरता से सोच कर ठोस कदम उठाने होंगे।ज़िला प्रशासन को त्वरित करवाई करनी होगी। कोचिंग संस्थान एवम होस्टल संचालकों को ऐसी घटनाएं नहीं हो पुख्ता व्यवस्था करनी होगी। प्रशासन को घटना की जवाबदेही निश्चित कर दंडात्मक कदम अथवा पंजीकरण निरस्त करने की कठोर करवाई करनी होगी। तनाव.निराशा,अवसाद में स्टूडेंट को मनोरोग विशेषज्ञ का परामर्श मिले,स्टूडेंटस की बराबर निगरानी हो एवम होस्टल संचालकों का पंजीयन व प्रशिक्षण पर ध्यान देने जैसे कदम प्रभावी रूप से उठने होंगे। खाली निर्देश,आदेश से कुछ होने वाला नहीं।