“बौड़म” से “बुद्धिजीवी” तक

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बही खाता

सुलतान भारती

“बौड़म” से “बुद्धिजीवी” तक “

महान होने की दिशा में ‘वो ‘ लेखक पहली बाधा दौड़ पार कर चुका है ! उसने एक मोटी किताब लिख डाली है और अब वह बुद्धिजीवी कहलाने का हकदार है। लेकिन बौड़म से सीधे बुद्धिजीवी होकर भी वो संतुष्ट नहीं है ! वो किताब प्रकाशित करवाना चाहता है ताकि दुनियां जान ले कि एक और ‘कालिदास’ कुल्हाड़ी लेकर साहित्य की डाल पर बैठ गया है। अब वो प्रकाशक खोज रहा है, क्योंकि उसे मशहूर होने की जल्दी है ! एक महीने शहर में जूते घिसने के बाद उसके जोश और गलतफहमी का इंडीकेटर ज्वार से भाटा तक आ गया। शहर में प्रकाशक ‘आपदा’ की तरह प्रचुर मात्रा में थे , पर फ्री में छापने वाले ‘ अवसर ‘ की तरह गायब थे ! उस नवोदित लेखक और बरामद प्रकाशक के बीच कुछ ऐसा संवाद शुरू होता है, -‘ मैं अपनी किताब छपवाना चाहता हूं “!
” पहले कभी छपे हो?”
” ये मेरी पहली किताब है! ”
“ये मेरे सवाल का जवाब नहीं है ! मैंने पूछा , पहले कभी छपे हो ?”
” नहीं सर !” लेखक का कॉन्फिडेंस पिघलने लगा !
” तो मैं भी नहीं छाप सकता ! मैं नए घोड़े पर पैसा नही लगाता “!!
भरी दुपहरी में लेखक की प्रतिभा का टाइटैनिक डूबता नजर आया ! एक सौ नब्बे पेज की पांडुलिपि पहली बार गोबर्धन पहाड़ जैसी वजनी लगी ! उसने अपने टूटते ख्वाबों का कचरा आख़री बार सहेजने की कोशिश की, -‘ हर लेखक कभी न कभी नया घोड़ा होता है सर ! एक बार काठी लगा कर तो देखो “!
” एक बार मैंने जो कमिटमेंट कर दिया तो कर दिया “!
लेखक को इस सदमे से उबरने में हफ़ते भर लगा ! उसके बाद एक फेसबुकिया विद्वान् मित्र ने उन्हें।अंधेरे में रोशनी दिखाई, -‘ काहे सती होने की सोच रहे हो ! प्रकाशक तो तुम्हारी जेब मे बैठा आवाज़ लगा रहा है कि बोलो जी तुम क्या क्या खरीदोगे ! फेस बुक वॉल पर पब्लिशर ऐसे थोक में बैठे हैं जैसे शहतूत के पेड़ पर टिड्डी दल -“!
वो दिन और आज़ का दिन , लेखक टेलेंट हंट से बाहर नहीं निकल पाया ! पहला विशाल पब्लिशर यूपी से बहुत दूर विशाखापत्तनम में बरामद हुआ ! उसके वर्कशॉप में सिर्फ वेस्ट सेलर ऑथर की ही बुक छपती थी ! प्रकाशक बरामद हुआ तो लेखक को अपनी प्रतिभा के वाटर लेवल पर शक हुआ ! लिहाजा उसने पब्लिशर से अपनी दुविधा शेयर की , – ” मुझे कैसे यकीन होगा कि मैं बेस्ट सेलिंग ऑथर हूं -“?
” दुविधा में रहोगे तो बेस्ट सेलर की जगह ऑथर भी नहीं बन पाओगे ! मैं तुम्हारे व्हाट्स ऐप पर बेस्ट सेलिंग ऑथर होने के लिए ज़रूरी पैकेज भेजता हूं, सिलेक्ट करो ! जल्दी करो, तुम्हारे अंदर बेस्ट सेलिंग ऑथर होने के सारे लक्षण मुझे विशाखापत्तम से ही नज़र आ रहे हैं “!
बेस्ट सेलिंग ऑथर होने के लिए वो तंदूर में अभी झांक ही रहा था कि मित्र ने नया सुझाव दिया , -‘ इतनी दूर जाकर बेस्ट सेलर होने की ज़रूरत नहीं है, और भी गम है ज़माने में मुहब्बत के सिवा -! नज़दीक में ही कोई बेस्ट सेलिंग ऑथर बनाने वाला मिल जाए तो आखिर क्या बुरा है ?”
और,,, वो फेस बुक मंडी में दूसरे वैंडर की खोज में लग गया ! इस बार उसे अदभुत प्रकाशक मिला,जो शायद संत कबीर के परिवार से आया था ! उसने अपने बारे में लिखा था, – ” क्या आप अपनी किताब छपवाना चाहते हैं? किताब कहीं से भी छपवा लो, पर सलाह हम से लो! हम बताएंगे कि आप कैसे और कहां से किताब छपवा कर पूरी दुनियां में मशहूर हो सकते हैं ! फौरन नीचे दिया हुआ ‘अप्लाई ‘ का बटन दबाकर क़िस्मत का बंद फाटक खोलें”!
वह यही तो चहता था , लेकिन इस बार भी क़िस्मत बनाने वाला कारपेंटर आरी लेकर चेन्नई में बैठा था ! दुखी लेखक को उसके मित्र ने फिर समझाया, – ‘ बेस्ट सेलिंग ऑथर होने के लिए जल्दी मत करो ! फिर से ट्राई करते हैं, हो सकता है , किसी ने नजदीक में ही वर्कशॉप खोल रखा हो ! ” मित्र का अनुमान सही था – जिन खोजा तिन पाइयां !! प्रकाशक बरामद हो गया ! लेखक ने इस बार जोश के बजाय होश इस्तेमाल किया, -‘ एक सौ नब्बे पेज का नॉवेल है, चार्ज बताइए “!
उधर कंटिया और कैलकुलेटर लेकर फेसबुक वॉल पर बैठा पब्लिशर तैयार था़, -” सिर्फ पंद्रह हजार नौ सौ निन्नानबे”! लेखक दूध का जला था, उसने मट्ठे में भी फूंक मारी, -‘ इतने में किताब छप जाएगी न ?”
” हां, इतने में सिर्फ किताब ही छपेगी ! कवर पेज, एडीटिंग , सेटिंग , प्रूफ रीडिंग, पेपर बैक, जैकेट पेज और आईएसबीएन नंबर का खर्चा अलग है !” लेखक को लगा कि कमरे में जल रहा इकलौता बल्ब फ्यूज हो गया है ! इस जन्म में मशहूर हो पाना कठिन होता जा रहा था ! फिर भी उसने एक आख़री कोशिश की , -” इतने झमेले के बाद तो मैं बेस्ट सेलर ऑथर हो जाऊंगा न ?”
” नहीं ! बत्तीस हजार खर्च करने के बाद आप लेखक हो जाएंगे ! सोचिए, कितने काम पैसों में कितना बड़ा सम्मान घर लेकर जायेंगे “!
” मगर मुझे तो बेस्ट सेलर ऑथर होना है !”
अच्छा वो ! देखिए वो पैकेज आप अफोर्ड नहीं कर पाएंगे ! बड़ा महंगा है !!”
” कोई बात नहीं – मुझको चांद लाकर दो”!
” ठीक है, वो पैकेज है तो एक लाख रुपए का , लेकिन आप जैसे बुद्धिजीवी को अस्सी हज़ार में दे देता हूं – कैश सब्सिडी अट्ठारह हज़ार ! तो,,, कब हो रहे हैं बेस्ट सेलर ऑथर ?”
” आप को कैसे पता कि मैं बुद्धिजीवी हूं! गांव में सारे लोग मुझे बौड़म कहते हैं ?”
“आप मुफ़्त में कभी भी बुद्धिजीवी नहीं हो सकते ! कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है ! तो कब खो रहे हैं आप,,,,, मेरा मतलब – कब हो रहे हैं आप “?
इस बार लेखक बिलकुल मायूस नहीं हुआ ! वो बेस्ट ऑथर और बुद्धिजीवी बनाने वाला पाइथागोरस का फॉर्मूला समझ गया था ! अगले दिन लोगों ने फेसबुक वॉल पर एक नया विज्ञापन देखा, – क्या आप अठारह दिन में बेस्ट सेलिंग बुक लिखना चाहते हैं ! फ़ौरन हमारे दिए हुए लिंक पर क्लिक करें ! हम बनाएंगे आपको “बौड़म” से “बुद्धिजीवी” !! ( आप से क्या छुपाना – सास भी कभी बहू थी ! ) जल्दी करें, सीटें सीमित हैं और बौड़म ज्यादा।”।
( कथित बुद्धिजीवियों के कमेन्ट आना चालू!)