लखीमपुर में 18 से 20 अगस्त तक किसानों का विराट धरना

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संयुक्त किसान मोर्चा 18 से 20 अगस्त तक लखीमपुर खीरी में किसानों और कृषि श्रमिकों का एक विशाल पक्का मोर्चा आयोजित कर रहा है और इसमें लाखों किसानों के भाग लेने की उम्मीद है।

इस विरोध के लिए एआईकेएमएस हजारों की लामबंदी का नेतृत्व करेगा। वे प्रयागराज, मुरादाबाद, बिजनौर, कौशांबी, हरिद्वार, हापुड़, मेरठ, उन्नाव के साथ-साथ पंजाब से एक विशाल दल में भाग लेंगे।

इस विरोध में उठाए जाने वाले मुद्दों में भाजपा सरकार द्वारा अजय मिश्रा टेनी को निरंतर संरक्षण दिया जाना है। टेनी ने 3 अक्टूबर, 2022 को लखीमपुर में किसानों के नरसंहार का आयोजन कराया था। सरकार ने न तो उन्हें मंत्री के पद से हटाया है और न ही उनकी गिरफ्तारी की अनुमति दी है, जबकि वे मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामित हैं।

सरकार किसानों के विरुद्ध सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने में भी विफल रही है हालांकि उसने इस आशय का लिखित में आश्वासन दिया था और उसने अभी तक शहीदों के परिवारों को मुआवजे का भुगतान भी नहीं किया है।

इस बीच एसकेएम ने एमएसपी पर निर्णय लेने के लिए गठित समिति पर गंभीर आपत्ति जताई है क्योंकि यह किसानों को दिए गए लिखित वादे के पूरी तरह से खिलाफ है। वादा था कि समिति का ‘एक जनादेश यह होगा कि देश के किसानों को एमएसपी कैसे दिया जाए’। इसमें कहा गया था कि समिति में किसानों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक दोनों होंगे। पर, सबसे पहले सरकार ने इसमें उन किसानों को शामिल किया है जो किसानों के लिए एमएसपी की मांग का स्पष्ट विरोध करते रहे हैं। दूसरे, सरकार ने फसलों में विविधता लाने, रासायनिक मुक्त प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्यों को भी इसमें शामिल किया है और ये दोनों ही एक लाभदायक एमएसपी सुनिश्चित करने से ध्यान हटाते हैं। यह देश की बुनियादी खाद्य फसलों के उत्पादन को घटाने और खाद्य सुरक्षा कम करने पर केंद्रित करते हैं, जो कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट्स की लंबे समय से मांग रही है। जोे 3 काले कृषि कानून बने थे, वे इन्हीं कम्पनियोें के प्रोत्साहन पर पारित किये गए थे।

हालांकि सरकार ने स्पष्ट रूप से वादा किया था कि किसानों और एसकेएम के विचारों को ध्यान में रखे बिना नया बिजली बिल पेश नहीं किया जाएगा, उसने यह बिल पेश कर दिया है। यह बिल सभी राज्यों को बिजली वितरण और टैरिफ पर केंद्रीय निर्देशों का पालन करने का आदेश देता है। यह इस बात को सुनिश्चित करता है कि सभी क्षेत्रों से बिजली लागत का भुगतान कराया जाए, यानी कोई सब्सिडी नहीं होगी। यह प्रीपेड मीटर शुरू करने और सभी सिंचाई पंपों पर मीटर लगाने को कहता है। यूपी सरकार ने पहले ही इन उपायों को लागू करना शुरू कर दिया है और वह बिजली आपूर्ति काटने के लिए छापेमारी कर रही है, जिससे गरीब लोगों को भारी परेशानी हो रही है। एसकेएम मांग करेगा कि सभी कृषि गतिविधियों के लिए मुफ्त बिजली आपूर्ति की जाए, सभी किसान व मजदूर उपभोक्ताओं के लिए 300 यूनिट की मुफ्त बिजली दी जाए, प्रीपेड मीटरों और डिस्कनेक्ट करने पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए।

योगी सरकार द्वारा किसान समुदाय के लिए बढ़ाई गईं कई अन्य समस्याओं, जैसे बुलडोजर का उपयोग करके कई जिलों में मछुआरों की नावों को नष्ट किया जाना, और बढ़ रही महंगाई, बेरोजगारी, मनरेगा में 500 रुपये प्रति दिन का भुगतान, राशन के उचित वितरण, पेंशन को बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रतिमाह करने, गन्ना बकाया का भुगतान से संबंधित समस्याओं पर भी प्रकाश डाला जाएगा।
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डॉ आशीष मित्तल
महासचिव, एआईकेएमएस ,
सदस्य एसकेएम
9415235272, 7318305913

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