Jharkhand, जमशेदपुर: केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित “मेरा पैड-मेरा अधिकार” योजना का शुभारम्भ, पटमदा की मां लक्ष्मी महिला समूह करेगी झारखण्ड का प्रतिनिधित्व

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अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस के अवसर पर आज नाबार्ड द्वारा वित्त प्रदत्त ” मेरा पैड मेरा अधिकार” योजना का ऑनलाइन उदघाटन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री, भारत सरकार श्रीमती स्मृति ईरानी द्वारा किया गया। नाबार्ड के चेयरमैन श्री जी आर चिंताला, पैड मैन के नाम से मशहूर पद्मश्री विजेता श्री अरुणाचलम मुरुगनाथम, श्री ए के पाढ़ी- मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय रांची,  सिद्धार्थ शंकर- जिला विकास प्रबंधक- नाबार्ड पूर्वी सिंहभूम समेत देश के अन्य अधिकारियो, गणमान्य व्यक्तयों की उपस्थिति में उद्घाटन कार्यक्रम किया गया। इस योजना के प्रथम चरण मे वर्ष 2020-21 के लिए पूरे देश से पूर्वी सिंहभूम समेत 30 जिलों का चयन किया गया है और झारखण्ड का प्रतिनिधित्व  के लिए मां लक्ष्मी महिला, समूह ग्राम धतकीडीह, प्रखंड पटमदा, जिला पूर्वी सिंहभूम को चुना गया है।
जिला विकास प्रबंधक- नाबार्ड पूर्वी सिंहभूम ने बताया कि इस योजना के तहत नाबार्ड द्वारा चयनित स्वयं सहायता समूह को एक सैनेटरी पैड बनाने की मशीन, दो महीने की कार्यशील पूंजी के साथ-साथ आवश्यक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा । इस परियोजना के अंतर्गत नाबार्ड  द्वारा प्रत्येक चयनित स्वयं सहायता समूह को सैनेटरी पैड यूनिट की स्थापना  के लिए लगभग 5.25 लाख रुपए खर्च करेगा।  इस अवसर पर नाबार्ड के चेयरमैन श्री जी आर चिंताला ने बताया कि आने वाले समय में नाबार्ड देश के सभी जिले में इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूह के माध्यम से एक एक सैनेटरी पैड उत्पादन की यूनिट की स्थापना के लिए वित्तीय सहयोग करेगी। ज्ञात हो इस परियोजना के लिए आवश्यक प्रशिक्षण तथा मशीन का सप्लाई पदमश्री अरुणाचलम मुरुगनाथम के द्वारा किया जाएगा।
मां लक्ष्मी महिला समूह से श्रीमति शांति महतो,  नियति महतो तथा सत्यवती महतो ने नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यालय राँची से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया । मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमति स्मृति ईरानी को बताया कि उनके जिंदगी में पहला बड़ा बदलाव 2013 में तब आया जब नाबार्ड द्वारा उनके गांव मे स्वयं सहायता समूह का गठन करवाया गया, जिससे कि गरीब महिलाएं छोटी बचत करने के साथ साथ कुछ पैसे कमना भी सीखी । और अब आज के दिन उनके जिंदगी मे दूसरा बड़ा बदलाव आएगा जब वो नाबार्ड के मेरा पैड मेरा अधिकार परियोजना से जुड़ कर अपना छोटा उद्द्योग शुरू करेंगी जिनसे उनकी आर्थिक स्थति तो बेहतर होगी ही साथ ही साथ उनके द्वारा बनाए गए पैड के इस्तेमाल से सैंकड़ो-हजारों गरीब ग्रामीण महिलाओं को माहवारी सम्बंधित कई गंभीर रोग से मुक्ति मिल पाएगा ।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री द्वारा नाबार्ड द्वारा मेरा पैड मेरा अधिकार समेत ग्रामीण विकास के लिए चलाई जा रही विभिन्न परियोजनाओं का प्रशंसा किया गया।(UNA)