Jharkhand, जामताड़ा: राज्य सरकार के प्रोत्साहन के बिना दम तोड़ता गाँव का कुटीर उद्योग

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जामताड़ा: करमाटांड़ प्रखंड अंतर्गत तुतूलबंधा गांव में  मोहली समुदाय (अनुसूचित जाति) के गरीब 40 से 50 परिवार रहते हैं. ये लोग बांस से अनेक प्रकार के वस्तुएं बनाकर अपना जीवन व्यापन करते हैं.
लोगों का कहना है बहुत मेहनत और दूर दूर जाकर बांस खोज कर लाते हैं. कुछ महीनों में बांस भी महंगा हो गया है और हमें मेहनत का उचित मूल्य भी नहीं मिलती है. इस रोजगार को बचाने के लिए न कोई सरकारी पहल होती है और  न सरकार से किसी प्रकार की सहायता राशि मिलती है. 70 साल की वृद्ध महिला बसमतिया देवी ने बताया कि थोड़ा बहुत जो वृद्धा पेंशन मिलता है वो भी कई महीनों से मिलना बंद हो गया है. उन्होंने अपना जला हुआ पैर दिखाई की इस उम्र न ठीक से बैठ होता है और न चल फिर होता है पर दो पैसा मिले उसके लिए बांस का टोकरी बनाती हूँ.
वर्तमान समय में गांव के लोगों द्वारा आत्म निर्भर रहने के लिए अनेक प्रकार का कुटीर उद्योग चलाते थे. कोई लोहा पिटता सुनाई पड़ता था, तो कोई, लड़की ठोकता नज़र आता था. गांव से गुजरने पर कच्ची घानी का तेल की महक आती थी तो औरतों द्वारा धान कूटते हुए नजर आती थी. पूंजीवाद और उद्योगीकरण के कारण ये सब दम तोड़ती गई और जो गांव के लोग खुशहाल एवं स्वच्छ जीवन जीते थे आज वो खुदकुशी करने पर मजबूर हैं.
इसलिए राज्य एवं केंद्र की सरकार को जनहित एवं सामूहिक रोजगार को बढ़ावा दें ताकि देश और समाज दोनों विकसित और समृद्ध बनें.(UNA)