Jharkhand: डाल्टनगंज में स्टेन स्वामी की गिरफ्तारी एवं अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे हमले के खिलाफ विरोध दर्ज

0
99
पलामू: जिला मुख्यालय डाल्टनगंज में जिले के विभिन्न जन संगठनों, चर्च संगठनों, राजनीतिक संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फर्जी भीमा कोरेगांव केस में 83 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता स्टेन स्वामी की एनआईए द्वारा की गयी गिरफ्तारी एवं अभिव्यक्ति की आजादी पर हो रहे तेज हमले के खिलाफ मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज किया गया। मानव श्रृंखला में शामिल लोग स्थानीय कचहरी चौक से शहीद चौक तक उचित सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए हाथों में तख्तियां, बैनर और पोस्टर लिए खड़े थे। जिनपर फा0 स्टेन को रिहा करो, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बंद करो, UAPA, रासुका जैसे काले कानूनों का दुरुपयोग बंद करो, किस–किस को कैद करोगे, हम फादर स्टेन के साथ हैं, भीमा कोरेगांव केस में फंसाए गए सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, लोक कलाकारों को रिहा करो आदि लिखे गए थे।
  बताते चलें कि पिछले 8 अक्टूबर 2020 को नैशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) ने रांची से 83-वर्षीय फादर स्टेन स्वामी को भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार किया। इस मामले में उनके आवास पर अगस्त 2018 और जून 2019 को पुणे पुलिस द्वारा छापा मारा गया था, तब उनके कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन, गानों की सीडी आदि जप्त की गयी थी। जुलाई-अगस्त 2020 में NIA ने उनसे 15 घंटों तक उनके आवास पर पूछताछ की थी।
वहीं दूसरी ओर, इस मामले में हिंदुत्व संगठन के करीबी तुषार दामगुड़े द्वारा की गई प्राथमिकी को महाराष्ट्र पुलिस ने एक षड्यंत्र का रूप दिया और यह कहानी रची कि एलगार परिषद और उस दौरान हुई हिंसा माओवादियों ने कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आयोजित की थी। इस प्राथमिकी में विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम (UAPA) और देशद्रोह की धाराओं को जोड़कर देश के कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, वकीलों व बुद्धिजीवियों को आरोपी और संदिग्ध बना दिया। 1 जनवरी 2018 से अब तक कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से इस मामले में पूछताछ की गयी है, कई लोगों के घर पर छापे मारे गए हैं और कई को तो गिरफ्तार भी किया गया है। अभी तक स्टेन स्वामी समेत 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें निम्न मानवाधिकार कार्यकर्ता, वकील, सांस्कृतिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हैं:- आनंद तेलतुम्ब्ड़े, अरुण फ़रेरा, गौतम नवलखा, हनी बाबु, महेश राउत, सुरेन्द्र गाडलिंग, सुधा भरद्वाज, शोमा सेन, सुधीर धावले, रोना विल्सन, वर्नन गोंज़ल्वेस, वरावरा राव और कबीर कला मंच से जुड़े रमेश गैचोर, सागर गोरखे और ज्योति जगताप। ये सभी ऐसे व्यक्ति हैं जो दशकों से आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यकों और वंचितों के अधिकारों के लिए संघर्षत रहे हैं। मज़ेदार बात है कि एल्गार परिषद व भीमा-कोरेगांव के समारोह में इनमें से अधिकांश व्यक्ति उपस्थित भी नहीं थे।
मानव श्रृंखला का आयोजन मानव अधिकार रक्षा मंच, पलामू के नेतृत्व में की गई। जिसमें मुख्य रूप से सीपीआई से के के0 डी0 , ईप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार,  नंदलाला सिंह, प्रेम प्रकाश, रवि,  संजीव, दिनेश,  एनसीडीएचआर के राज्य समन्वयक मिथिलेश कुमार,  झारखण्ड नरेगा वाच के राज्य समन्वयक जेम्स हेरेंज, जितेन्द्र सिंह, तंजीम अंसार कमेटी के सदर अशफाक अहमद, सचिव नसिम अहमद, कोषाध्यक्ष मो. से सेराज अंसारी, सरफराज अहमद, अलाउद्दीन अंसारी,  फादर विजय, फादर मोरिस, फादर
 प्रदीप, फाझर लोरेंस, सिस्टर जोसी, सिस्टर  वालसा, सिस्टर
इग्लेसिया और डालटनगंज के सभी संस्थानों के धर्म बहनें, यूनाइटेड मिलि फोरम, इसलाम अंसारी, आदिवासी महासभा से बलराम उरांव, जन संग्राम मोरचा से युगल पाल, अशोक पाल, पाल महासभा से रवि पाल, महिला अधिकार संघर्ष समिति पूनम विश्वकर्मा, एंजेल, हर्ष, सिरिल टोप्पो, झारखंड क्रांति मंच से शत्रुध्न कुमार शत्रु  सहित विभिन्न संगठन के हजारों लोग शामिल थे।(UNA)