कानपुर देहात के बेसिक शिक्षा विभाग में जमकर भ्र्ष्टाचार का किया जा रहा है बीएसए से लेकर ऑफिस के बाबू तक सभी भ्र्ष्टाचार करने में लगे हुए है लेकिन योगी सरकार में बैठे अधिकारी ऐसे भृष्टाचारियो पर कोई अंकुश नही लगा रही है या यूं कहें कि जीरो टालरेंस की बात करने वाली योगी सरकार अब अपने अधिकारियो से भ्र्ष्टाचार करवाने पर उतर आई है । बीएसए और बाबू के लगातार एक के बाद एक भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे है पहले कानपुर देहात की बीएसए संगीता सिंह और बाबू शंकरलाल ने बिना शासनादेश बड़े पैमाने पर भ्र्ष्टाचार करते हुए 23 शिक्षकों और 10 लिपिकों का ट्रांसफर कर दिया इसके बाद एक शिक्षक जगदंबिका प्रसाद से ट्रांसफर के नाम पर 60 हजार रूपये लिए गए रुपये न देने पर उनको धमकाया गया जिसका ऑडियो भी वायरल हुआ आज 1 महीने बीत जाने के बाद भी योगी सरकार में बैठे अधिकारियो ने ऐसे भ्र्ष्टाचार करने वाली बीएसए और बाबू के खिलाफ कोई कार्यवाही नही की जबकि मीडिया द्वारा बीएसए और बाबू के खिलाफ तथ्यों के साथ भ्र्ष्टाचार की खबर को प्रमुखता से दिखाया था जिसके बाद कमिश्नर ने जांच में दोषी पाए जाने के बाद ट्रांसफर प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी लेकिन भृष्टाचारी बीएसए और बाबू पर अब कोई कार्यवाही नही गयी है । बीएसए और बाबू द्वारा किये गये भ्र्ष्टाचार के मामले पर जनपद के डीएम राकेश कुमार सिंह , यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कार्यवाही के लिये कहा था लेकिन आज तक बीएसए और बाबू पर कार्यवाही नही की गयी बल्कि बीएसए और बाबू द्वारा दबंगई के बल पर आज भी भ्र्ष्टाचार करने का सिलसिला जारी है ।
आपको बता दे कि कानपुर देहात की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संगीता सिंह और ऑफिस में तैनात बाबू शंकर लाल ने मिली भगत करके बड़े पैमाने पर भ्र्ष्टाचार करते हुए बिना शासनादेश 23 शिक्षकों और 10 लिपिकों का ट्रांसफर कर दिया। शिक्षकों और लिपिकों को मनचाही जगह तैनाती दे दी गयी। भ्र्ष्टाचार कर बिना शासनादेश ट्रांसफर करने पर ऑफिस में ही तैनात एक बाबू ओ पी शुक्ला और आरटीआई कार्यकर्ता संजय दीक्षित ने इसकी शिकायत की शासन से की थी । जिस पर मीडिया ने बीएसए और बाबू के इस भ्र्ष्टाचार का खुलासा किया था जिसके बाद कमिश्नर ने जांच में मामला सही पाए जाने पर शिक्षकों और लिपिकों के ट्रांसफर पर रोक लगा दी थी लेकिन अभी तक बीएसए संगीता सिंह और बाबू शंकर लाल पर कार्यवाही नही की गयी है ये भ्र्ष्टाचार का खेल चल ही रहा था कि फिर एक और शिक्षक जगदम्बिका प्रसाद मिश्रा ने बीएसए संगीता सिंह पर बाबू शंकर लाल पर गंभीर आरोप लगाये शिक्षक जगदम्बिका प्रसाद मिश्रा  की माने तो बीएसए संगीता सिंह बाबू शंकर लाल के द्वारा शिक्षकों से रुपये मांगती है शिक्षकों द्वारा रुपये न देने पर प्रताड़ित करती है और सस्पेंड कर देती है बाद में मोटी रकम लेकर बहाल कर देती है ऐसा ही शिक्षक जगदम्बिका प्रसाद मिश्रा के साथ किया गया जब बाबू शंकर लाल के माध्यम से शिक्षक का ट्रांसफर करने के नाम पर उनसे 60 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गयी  जिसके ऑडियो वायरल हो रहे है । अलग अलग ऑडियो में बाबू शंकर लाल द्वारा रुपये की मांग की जा रही है ये पैसा बाबू के द्वारा बीएसए तक जाता है । बीएसए और बाबू पर एक के बाद एक भ्र्ष्टाचार के मामले उजागर हो रहे है लेकिन योगी सरकार में बैठे अधिकारी आँख बंद करके भ्र्ष्टाचार कराने में लगे हुए है मीडिया बीएसए और बाबू का सभी साक्ष्यों के साथ लगातार भ्र्ष्टाचार उजागर कर रहा है फिर भी प्रदेश की योगी सरकार ने ऐसे भृष्टाचारी बीएसए संगीता सिंह और बाबू शंकर लाल पर अब तक कोई कार्यवाही नही की है
वही मीडिया द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में बीएसए और बाबू द्वारा भ्र्ष्टाचार कर बिना शासनादेश  शिक्षकों और लिपिकों के ट्रांसफर कर देने की खबर दिखाये जाने के बाद जनपद के जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह से लेकर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री मुकुट बिहारी और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने खबर का संज्ञान लेकर कहा कि किसी भी सूरत में भृष्टाचारियो को बख्शा नही जायेगा । भृष्टाचारी बीएसए और बाबू के खिलाफ कार्यवाही करने की बात कही थी । योगी सरकार भृष्टाचारियो पर कार्यवाही करेगी ,,,,,,,,,,,,, देखिये हम को सुनाते है कि जनपद के डीएम राकेश कुमार सिंह के साथ यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री / जिले के प्रभारी मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने ऐसे भृष्टाचारियो पर कार्यवाही करने के लिये क्या कहा था
 सभी साक्ष्यों के साथ बीएसए संगीता सिंह और बाबू शंकर लाल पर भ्र्ष्टाचार उजागर होने के बाद भी योगी सरकार ने ऐसे भृष्टाचारियो पर कोई कार्यवाही नही की है जीरो टालरेंस की बात करने वाली योगी सरकार अब सवालो के घेरे में है या यूँ कहे कि अब योगी सरकार ने अपने अधिकारियो को भ्र्ष्टाचार करने की खुली छूट दे दी है अब देखना होगा कि ऐसे भृष्टाचारियो पर कब और कौन कार्यवाही करेगा