GHOTALO KI BHET VIKAS YOJANA
जहां एक ओर प्रदेश की योगी सरकार सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही किये जाने का दावा कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही हैं। न तो सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार से बच पा रही हैं और न ही भ्रष्टाचारियों पर कार्यवाही हो पा रही हैं। जिसके चलते विकास के नाम पर केवल भ्रष्टाचार ही लोगो को मिल रहा हैं। सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार की शिकायत होने के बाद जांच टीम की जांच में भ्रष्टाचार का खुलासा भी हो रहा हैं। ऐसा ही एक मामला यूपी के जनपद कानपुर देहात में देखने को मिला। जहां ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव ने मिलकर सरकार योजनाओं का ऐसा बंदरबांट किया कि विकास के आस लगाये बैठे ग्रामीणों को केवल भ्रष्टाचार ही हाथ लगा। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने जिले के आलाधिकारियों से की। जिसके बाद अधिकारियों ने जांच टीम को मौके पर जांच कराया। जांच में भी विकास योजनाओं में भ्रष्टाचार होने की पुष्टि भी हो गई।
मामला हैं कानपुर देहात के झींझक विकास खण्ड क्षेत्र में बनीपारा ग्राम पंचायत का। जहां की ग्राम प्रधान निर्मला तिवारी और पंचायत सचिव सुशील चैधरी ने पंचायत के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार की। जिसके बाद शासन ने ग्राम पंचायत बनीपारा के विकास के लिए धनराशि भी आंवटित हो गई। जिसके चलते ग्रामीणों को ग्राम पंचायत की तस्वीर बदलने की उम्मीद जागी। लेकिन ग्राम प्रधान निर्मला तिवारी और पंचायत सचिव सुशील चैधरी ने विकास के नाम पर केवल धनराशि का बंदरबांट कर लिया। न तो पंचायत क्षेत्र में विकास कराये और न ही अन्य कार्य। यहीं नहीं ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर एक कार्य का दो बार भुगतान कराकर धनराशि का आपस में बंदरबांट कर लिया। वहीं ग्राम पंचायत को रोशन करने के लिए शासन ने एलईडी स्ट्रीट लाइटे लगाने की योजना को भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा दिया। सस्ती एलईडी लाइटे लगवाकर प्रधान और सचिव ने महंगे बिलों पर भुगतान करा लिया। जिसका खुलासा होने के बाद ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की। जिसके बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच टीम गठित कर दी और मौके पर सत्यापन करने भेजा तो जांच में विकास के नाम पर भ्रष्टाचार होने की पुष्टि हो गई।
 शिकायतकार्ताओं की माने तो ग्राम प्रधान और सचिव ने मिलकर ग्राम पंचायत में विकास कराने के नाम पर केवल भ्रष्टाचार किया। कोई भी कार्य विकास का ग्राम पंचायत में हुआ ही नहीं। यहीं नहीं ग्राम प्रधान और सचिव ने एलईडी लाईटे जिसकी मार्केट में दाम 12 सौ रू0 के आस-पास हैं उसका भुगतान 3 हजार से भी अधिक मूल्य में कराया। वहीं प्रधान और सचिव ने इंटरलाकिंग न कराकर उसका भुगतान भी करा लिया। यहीं नहीं एक कार्य को दो बार दिखाकर उसका दो-दो बार भुगतान कराकर बंदरबांट कर लिया। जिसकी शिकायत जिलाधिकारी से की गईं। जिलाधिकारी ने जांच टीम का गठन कर मौके की जांच कर रिर्पोट देने के निर्देश दिये थे। आज मौके पर पहुचे जांच अधिकारी को भी विकास के नाम पर भ्रष्टाचार ही मिला।
वहीं बनीपारा ग्राम पंचायत में जांच करने पहुचे जिला मत्स्य अधिकारी रणजीत सिंह की माने तो ग्रामीणों की शिकायत पर जिलाधिकारी के निर्देश पर जांच करने पहुचे हैं। बनीपारा ग्राम पंचायत में विकास की कई योजनाओं में अनिमितताए मिली हैं। जिसकी जांच रिर्पोट जल्द ही जिलाधिकारी को प्रेषित कर दी जायेगी।