OVERLOAD KA KHEL
जहां एक ओर योगी सरकार अवैध खनन और खनन को मानक के अनुरूप कराने के लिए कठोर कदम उठाये जाने के साथ खनन माफियाओं पर सख्त कार्यवाही करने के दावे कर रही हैं। यहीं नहीं मौजूदा समय ओवरलोड पर लगाम लगाने का भी दावा करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। वहीं दूसरी ओर इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं। न तो अवैध खनन रूक रहा हैं और न ही अवैध खनन करने वाले माफियाओं पर कार्यवाही हो रही हैं। यहीं नहीं खनन माफिया ओवरलोड का भी खेल खुलेआम खेल रहे हैं और ओवरलोड लदे वाहनों को तीरपाल के माध्यम से ढक कर बेखौफ निकाल रहे हैं। वहीं खनन की परमीशन के नाम पर खनन माफिया खुलेआम अवैध खनन का खेल कर रहे हैं। खनन माफिया यमुना की जल धरा को प्रभावित कर मशीनों के माध्यम से जमकर खनन किया जा रहा हैं और पानी से बालू को निकाल रहे हैं। वहीं जिम्मेदार कार्यवाही के नाम पर मात्र जांच कराने की बात कह पल्ला झाड़ रहे हैं। ऐसा ही कुछ हाल यूपी के जनपद कानपुर देहात में यमुना नदी के बालू घाटों में देखने को मिल रहा है। जहां खुलेआम खनन माफिया यमुना नदी की जलधरा को प्रभावित कर मशीनों के माध्यम से पानी से बालू का खनन कर रहे हैं और ओवरलोड वाहनों को भी बेखौफ होकर निकाल रहे हैं। वही जिम्मेदार लेकिन कार्यवाही करने के नाम पर मात्र जांच कराने की बात कह पल्ला झाड़ रहे हैं।
 मामला हैं कानपुर देहात के भोगनीपुर तहसील क्षेत्र के यमुना नदी के किनारे स्थित खरका बालू घाट का। जहां योगी सरकार द्वारा बालू खनन की परमीशन खनन माफिया राम अवतार सिंह की फर्म हरिहर मेनरल एल0एल0पी0 उरई को दिया गया है। जिसके बाद से खनन माफिया का अवैध तरीके से बालू खनन करने और यमुना से बालू निकालने के साथ ओवरलोड़ का खेल शुरू हो गया। अधिकारियों और राजनितिक लोगो से पैठ बनाकर एनजीटी के नियमों को ताख पर रखकर जमकर प्रतिबंधित मशीनों के माध्यम से यमुना के पानी से खनन का खेल शुरू हो गया। यहीं नहीं यमुना की धारा प्रभावित कर पानी के अन्दर से मशीनों के माध्यम से बालू का खनन किया जा रहा हैं। जिससे यमुना की जलधरा तो प्रभावित हुई साथ ही गहरे गडढे भी बन गये। वहीं समय-समय जिम्मेदारों ने मौके पर जाकर जांच करना मुनासिफ नहीं समझा हैं। अधिकारी द्वारा निरीक्षण के नाम पर केवल खानापूर्ति भर की जाती हैं। न तो कभी मौके का निरीक्षण किया गया और न ही ऐसे खनन माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही की गई। जिसकी हकीकत मौके में बने ये मशीनों से पानी से निकाली गई बालू के चलते बने गडढो और जलधरा से बालू निकालकर एकत्र किये गये ढेर को देखकर लगता हैं। यहीं नहीं ओवरलोड वाहनों और तीरपाल से ढकते इन मजदूरों को भी देखकर लगाया जा सकता हैं कि ओवरलोड़ पर किस तरह कार्यवाही की जा रही हैं। जिसकी वजह से सड़कों पर कई जगह गड्ढे बन गये हैं और पुलिया भी टूट गई हैं। खनन माफियाओं के इस खेल में गांव के लोग प्रभावित हो रहे हैं। उनकी फसलों को नुकसान होने के साथ ही मकानों को भी नुकसान हो रहा हैं। वहीं जब ग्रामीण इसका विरोध करते हैं तो उन्हे खनन माफिया के कहर का सामना करना पड़ता हैं।
वहीं ओवरलोड वाहनों के चालकों की माने तो यमुना से मशीनों के माध्यम से बालू का खनन किया जा रहा हैं। वहीं ओवरलोड़ से मुनाफा होने की बात स्वीकार करते हुए बेखौफ होकर ओवरलोड वाहन निकालने की बात कही। यहीं नहीं वाहन चालकों के अनुसार कोई भी अधिकारी मौके पर जाकर जांच करना मुनासिफ नहीं समझते हैं।
वहीं विपक्षी नेताओं ने मौजूदा सरकार में हो रहे खनन और ओवरलोड के खेल पर सवाल उठाते हुए योगी सरकार की ओलचना कर रहे हैं। साथ ही ऐसे माफियाओं के खिलाफ की मांग कर रहे हैं।
जलधरा से मशीनों के माध्यम से बालू का खनन करने और ओवरलोड वाहनों को बेखौफ होकर निकालने की बात पर जिले के जिलाधिकारी ने मौके पर टीम को भेजकर जांच कराने और जांच में दोषि पाये जाने पर खनन ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की बात कही।