Kolkata पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में अब बेहद कम समय रह गया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अप्रैल-मई के मध्य में राज्य में चुनाव कराने की घोषणा कर सकता है।

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Kolkata पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में अब बेहद कम समय रह गया है। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग अप्रैल-मई के मध्य में राज्य में चुनाव कराने की घोषणा कर सकता है। इस बीच टाइम्स नाउ और सी-वोटर ने बंगाल में लोकप्रिय पार्टियों और नेताओं का सर्वे किया है। इसमें पहली बार भाजपा को तृणमूल कांग्रेस से आगे निकलता माना जा रहा है। दरअसल, सर्वे में 41.6 फीसदी लोगों ने भाजपा का समर्थन किया है, जबकि टीएमसी 36.9 फीसदी जनता के समर्थन के साथ दूसरे नंबर पर फिसलती नजर आ रही है।
क्या है सर्वे के पूरे नतीजे?: टाइम्स नाउ और सी-वोटर की तरफ से 24 जनवरी से 4 फरवरी तक किए गए इस सर्वे में सामने आया है कि जहां भाजपा को पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा लोगों का समर्थन हासिल है, वहीं टीएमसी इस मामले में दूसरे नंबर पर है। इन दोनों पार्टियों के अलावा कोई और पार्टी जनता के समर्थन के मामले में दहाई प्रतिशत अंकों तक नहीं पहुंच पाई। चौथा नंबर कांग्रेस का है, जिसे 8.4 फीसदी जनता ने पसंद किया है।
सबसे खराब हालत लेफ्ट की है, जिसे महज 4.4 फीसदी लोगों ने अपनी पसंद बताया है। गौरतलब है कि लेफ्ट पार्टियों ने टीएमसी के आने से पहले तीन दशकों से भी ज्यादा लंबे समय (1977-2011) तक पश्चिम बंगाल पर राज किया था, हालांकि 2011 के बाद से ही लेफ्ट पार्टियों का बंगाल में वोट प्रतिशत गिरा है। 2015 के चुनाव में लेफ्ट को महज 19 सीटों पर ही जीत मिली थी।

भाजपा को सीएम का चेहरा न होने का नुकसान: दूसरी तरफ भाजपा के तमाम आरोपों के बावजूद ममता बनर्जी आज भी पश्चिम बंगाल में सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर सबसे आगे हैं। लगभग 54.3 फ़ीसदी लोग अब भी ममता बनर्जी को सीएम बनते देखना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के तौर पर उनके काम की सराहना करने वाले 49.7 फीसदी लोग हैं, जबकि 31 प्रतिशन ने उनके काम को खराब बताया है।
भाजपा के दिलीप घोष सीएम के पसंदीदा चेहरे के तौर पर दूसरे नंबर पर हैं। हालांकि, उन्हें सिर्फ 22.6 फीसदी लोगों ने ही पसंद किया है। तीसरे नंबर पर टीएमसी से भाजपा में आए मुकुल रॉय का नाम है, जबकि अब तक राजनीति में नहीं उतरे टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली 4.5 फीसदी लोगों के समर्थन के साथ चौथे सबसे पसंदीदा सीएम कैंडिडेट हैं। गौरतलब है कि भाजपा को कोई बड़ा सीएम का चेहरा नहीं होने का नुकसान उठाना पड़ रहा है।