Kolkata स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर शनिवार को बंगाल में सियासत एकदम से तेज हो गई। ऐसा इसलिए, क्योंकि मुख्यमंत्री और TMC चीफ ममता बनर्जी बिना किसी पूर्व नियोजित प्लान के नेताजी भवन (यहीं बोस का जन्म हुआ था और इसी भवन से कभी अंग्रेजों को चकमा देकर रवाना हो गए थे) पहुंचीं।

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Kolkata स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती पर शनिवार को बंगाल में सियासत एकदम से तेज हो गई। ऐसा इसलिए, क्योंकि मुख्यमंत्री और TMC चीफ ममता बनर्जी बिना किसी पूर्व नियोजित प्लान के नेताजी भवन (यहीं बोस का जन्म हुआ था और इसी भवन से कभी अंग्रेजों को चकमा देकर रवाना हो गए थे) पहुंचीं। उन्होंने वहां नेताजी के प्रति अपने श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। फिर कुछ देर रुकीं और फिर एक छोटा सा संबोधन दिया।

सूत्रों के हवाले से कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि दीदी ने इस दौरान केंद्र पर हमला बोला। पूछा, “मोदी सरकार ने इसे परामक्रम दिवस क्यों नाम दिया?” यह भी सवाल उठाया कि जिस योजना आयोग को नाम नेता जी ने दिया था, उसका भी नाम क्यों बदल (अब नीति आयोग है) दिया गया? दीदी यहां पर भाषण के बाद वहां से रवाना हो गईं। उन्होंने उसके बाद कोलकाता के श्याम बाजार से रेड रोड तक मार्च निकाला। यह रोड शो करीब आठ किमी लंबा रहा।

मार्च की शुरुआत से पहले उन्होंने कहा- मुझे पराक्रम शब्द समझ नहीं आता है। मुझे उनका (नेताजी) देश प्रेम, विचारधारा, जज्बात…समझ आते हैं। हमने इसे देशनायक दिवस क्यों घोषिक किया? इसलिए, क्योंकि रबींद्रनाथ टैगोर ने यह टाइटल दिया था…इसलिए क्योंकि नेता जी ने टैगोर के एंथम को पहचान दिलाई थी।