इकलेरा डांडा के श्रमिकों को नही मिल रहा भुगतान

बारां । किशनगंज ब्लॉक की रानीबडौद ग्राम पंचायत के गांव इकलेरा डांडा सहरिया बस्ती के मनरेगा श्रमिको को दिसंबर व जनवरी माह का भुकतान नही मिला है । श्रमिक नेमीचन्द व विमला बाई को 6 मस्टररोल, कैलाशी बाई को 1 मस्टररोल, रोशनी बाई व कन्हैयालाल को 6 मस्टररोल, राधेश्याम व चमो को 6 मस्टररोल, सोमवती को 2मस्टररोल, केला बाई को 1 मस्टररोल, नैनी बाई को 3 मस्टररोल, ब्रजमोहन व सावित्री को 6 मस्टररोल, कन्हैयालाल व प्रेम बाई को 6 मस्टररोल, रघुवीर व कैलाशी को 6 मस्टररोल, कमला बाई को 3 मस्टररोल, प्रीतम व प्यारी को 5 मस्टररोल, रामचंदी को 2 मस्टररोल, बंशीलाल व रामसिया को 6 मस्टररोल, मथुरालाल को 3 मस्टररोल, कविता को 1 मस्टररोल का भुकतान अभी तक भी नही मिला है । इसी तरह किशनगंज व शाहाबाद ब्लॉक के मनरेगा श्रमिको को दिसंबर व जनवरी का भुकतान नही मिलने के कारण श्रमिक आर्थिक तंगी का सामना कर रहे है । इस सम्बंध मे विकास अधिकारी दिवाकर मीणा ने बताया कि कुछ दिनों से राजस्थान सरकार से फण्ड नही आ रहा है, एफटीओ जनरेट हो गया है 2 से 4 दिन में श्रमिकों का भुकतान हो जाएगा ।

332 बच्चों और 55 गर्भवती महिलाओं को लगाए टीके 

 

कोटा। नियमित टीकाकरण से वंचित श्रमिक एवं मजदूर परिवार के बच्चों का टीकाकरण करने के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से शहर में नवाचार कर चलाए जा रहे विशेष अभियान अमावस्या टीकाकरण में चिकित्सा विभाग की टीमांे ने शहर की 69 साईटों पर जाकर 332 बच्चों को 789 एंटिजन डॉज के टीके निःशुल्क लगाए। जन्म से पांच साल तक के बच्चों को ये टीके 9 जानलेवा बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करेगें। अभियान में 55 गर्भवती महिलाओं को भी टीटी-1, टीटी-2 एवं टीटी-बी के टीके लगाए गए। इस दौरान आरसीएचओ डॉ. एमके त्रिपाठी सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों ने फिल्ड में घूमकर अभियान की मॉनिटरिंग की।

डॉ त्रिपाठी ने बताया कि यह अभियान प्रत्येक माह को अमावस के दिन चलाया जा रहा है। इस दिन कारीगर, मजदूर व श्रमिक लोगों के परिवार अवकाश पर घरों पर ही मिल जाते हैं। इससे उनके बच्चों का टीकाकरण करने में सुविधा रहती है। बच्चों को लगाए गए टीकों में ओपीवी, बीसीजी, आईपीवी, आरवीवी, पेन्टावेलेंट, डीपीटी, विटामिन-ए, मीजल्स जैसे टीकों की डॉजेज शामिल हैं।

पलायथा से 7 फरवरी को होगा विशेष शिविरों का शुभारंभ

बारां। राज्य सरकार के निदेशानुसार राजस्थान फसल ऋण माफी योजना-2019 के तहत जिले में 7 फरवरी 2019 को ग्राम सेवा सहकारी लि. पलायथा में प्रातः 11 बजे विशेष शिविर का आयोजन कर पात्र कृषकों को फसली ऋण माफी प्रमाण पत्रों का वितरण किया जाएगा। इसी क्रम में 8 फरवरी 2019 को ग्राम सेवा सहकारी समिति लि. छबड़ा में व ग्राम सेवा सहकारी समिति लि. सम्बलपुर में एवं 9 फरवरी 2019 को बारां कर्णधार ग्राम सेवा सहकारी समिति लि. बारां में व सुभाषघट्टी वृत्त कृषि बहुउद्देशीय सहकारी समिति लि. घट्टी में विशेष शिविर का आयोजन कर पात्र काश्तकारों को ऋण माफी प्रमाण पत्रों का वितरण किया जाएगा। उक्त सभी शिविर प्रातः 11 बजे से आयोजित हांेगे। यह जानकारी बारां केन्द्रीय सहकारी बैंक लि. के प्रबंध निदेशक गोविन्द लड्डा ने दी।

विधानसभा सत्र के दौरान बैठक आयोजित नहीं की जाएं

झालावाड़। पन्द्रहवीं राजस्थान विधानसभा के माननीय सदस्य विभिन्न राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय व तहसील स्तरीय समितियों में सदस्यों के रूप में मनोनीत हैं।

राजस्थान विधानसभा प्रथम सत्र प्रारम्भ होने से पूर्व माननीय विधानसभा अध्यक्ष के आदेशानुसार संसदीय कार्य विभाग द्वारा एक परिपत्र जारी किया गया है। ससंदीय कार्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव महावीर प्रसाद शर्मा ने बताया कि प्रपत्र के निर्देशानुसार सभी प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव, विशिष्ट शासन सचिव, सम्भागीय आयुक्त, विभागाध्यक्ष, जिला कलक्टर, शासन सचिव एवं आयुक्त पंचायती राज, शासन सचिव, नगरीय विकास एवं आवासन विभाग विशेष रूप से विधानसभा सत्र के दौरान बैठकें आयोजित नहीं करें।

माली समाज ने दी चेतावनी, वीएमओयू ने दस दिन में हाईकोर्ट के आदेश नहीं माने तो करेंगे आंदोलन 

– पीडि़त कर्मचारी के पक्ष में उतरा माली समाज, हाईकोर्ट के आदेश की पालना नहीं कर रहा वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय कोटा

 

कोटा। माली समाज के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत चन्द्रप्रकाश सुमन को हाईकोर्ट से मिली राहत की पालना करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि वीएमओयू ने हाईकोर्ट के निर्देशों की दस दिनों में पालना नहीं की तो माली समाज सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा, जिसकी जिम्मेदारी वीएमओयू प्रशासन की होगी।

रविवार को पत्रकार वार्ता के दौरान मौजूद सावित्री ज्योतिबा माली सैनी महासभा के संरक्षक भावेश चौहान, मंगलेश्वरी व्यायामशाला के अध्यक्ष नाथूलाल पहलवान, रामपुरा अखाड़ा छोटी समाध के उस्ताद बालकिशन बरथूनिया, पार्षद राकेश सुमन पुटरा, समिति अध्यक्ष बंशीलाल सुमन, देहात अध्यक्ष पूरण सुमन, नदी पार समिति के महामंत्री अमरलाल सुमन, माली धर्मरक्षक समिति अध्यक्ष चौथमल सुमन, महामंत्री शिवनारायण सुमन ने रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि पीडि़त कर्मचारी चन्द्रप्रकाश सुमन पिछले 30 वर्षों से वीएमओयू से पदोन्नति की प्रशासनिक एवं कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने गत वर्ष 11.9.2018 को राहत प्रदान करते हुए स्थानीय कोर्ट के 9.1.2006 को कर्मचारी के पक्ष में दिये गए आदेश को यथावत रखते हुए वीएमओयू को पदोन्नति के निर्देश जारी किये थे। बावजूद इसके वीएमओयू द्वारा हाईकोर्ट के आदेशों को फाइलों में दफन कर दिया गया। पीडि़त कर्मचारी न्याय की गुहार लेकर वीएमओयू अधिकारियों के चक्कर लगाकर भटकने को मजबूर हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं या न्याय नहीं मिल रहा।

उन्होंने कहा कि इसी संबंध में पिछले दिनों पीडि़त कर्मचारी चन्द्रप्रकाश सुमन ने परिवार सहित वीएमओयू के बाहर नौ दिनों तक धरना भी दिया था, एवं सावित्री ज्योतिबा माली सैनी महासभा पीडि़त कर्मचारी के पक्ष में विशाल प्रदर्शन विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर किया गया था। जिसके बाद वीएमओयू प्रशासन ने कर्मचारी की तीनों जायज मांगें मानते हुए मौखिक रूप से समझौता भी किया था, लेकिन अब वीएमओयू इस समझौते से भी इंकार कर रहा है। जबकि वीएमओयू के नियमानुसार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं हार्ट पेशेंट का गृह जिले से बाहर स्थानांतरण नहीं किया जा सकता, फिर भी यूनिवर्सिटी द्वारा अपने ही नियमों को उल्लंघन कर कर्मचारी को पीडि़त किया गया।

झूठा निलंबन भी किया

पीडि़त कर्मचारी चन्द्रप्रकाश सुमन ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कुलसचिव अशोक शर्मा द्वारा स्वयं के हस्ताक्षर से स्वयं का ही प्रमोशन कर पिछले आठ सालों का लाखों रूपयों का एरियर उठा लेने के अनैतिक कृत्य को उजागर करने की वजह से द्वेषतापूर्ण एवं मनमाने तरीके से निलंबित कर दिया गया। जिसकी 26 माह जांच चलने के बाद भी कर्मचारी पर कोई आरोप सिद्ध नहीं होने पर कुलपति द्वारा बहाल कर दिया गया। जबकि उच्च न्यायालय के आदेशानुसार 6 माह में निलंबित कर्मचारी की जांच पूर्ण की जानी थी, जिसकी अवमानना करते हुए दो साल में भी जांच नहीं की गई, इससे वे 26 माह तक वे वेतन से वंचित रहे, जो आजतक भी उन्हें नहीं दिया गया।

योग्यता थी एलडीसी की बना दिया चपरासी

पीडि़त कर्मचारी चन्द्रप्रकाश सुमन ने बताया कि उनके साथ वर्ष 1989 से आजतक द्वेषतापूर्ण कार्रवाई की जा रही है। वर्ष 1989 में वीएमओयू में नियुक्ति के समय योग्यता को दरकिनार कर कनिष्ठ लिपिक के स्थान पर चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति दी। इसके पश्चात 12.7.1989 को बनी डीपीसी नियमों को भी दरकिनार कर मनमाने तरीके से 18ए अध्यादेश निकालकर उन्हें प्रमोशन से वंचित कर दिया। 22.6.1989 को राज्य सरकार द्वारा बनाए गए सेवा नियम के अनुसार 15 प्रतिशत प्रमोशन कोटा यूनिवर्सिटी में लागू नहीं किया गया, जबकि 14.6.1989 को पारित आदेश से 15 प्रतिशत कोटे में कुल 23 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एकसाथ प्रमोशन दिया जा सकता था। 4.5.1996 को पैरा नंबर 125 ऑर्डर शीट के अनुसार वीएमओयू के तत्कालीन कुलसचिव एवं विधि सहायक द्वारा पीडि़त कर्मचारी के पक्ष में कार्यालय टिप्पणी की गई कि चन्द्रप्रकाश सुमन को पदोन्नति दिया जाना न्यायसंगत है।