शादी के उपहार में मिले 5 दिल,30 किडनी,140 आँखे

फेरे से पहले दूल्हे-दुल्हन ने 2000 लोगों के बीच लिया अंगदान का संकल्प

फेरे से पहले,1500 लोगों के बीच अंगदान का संकल्प

यूँ तो शादी का दिन अपने आप में सबसे ख़ास और सबसे ज्यादा खुशी का दिन होता है । शादी दो अजनबी लोगों के और उनके परिवारों के मिलन के साथ-साथ कई संस्कारों का मिलन भी है । शाइन इंडिया फाउंडेशन विगत 8 वर्षों से सम्पूर्ण संभाग में नैत्रदान-अंगदान-देहदान जागरूकता के लिये अनवरत कार्य कर रही है ।   से जुड़े टिंकू ओझा का विवाह ,ग्राम मुंडियर में 20 जनवरी को सम्पन्न हुआ । जैसा कि विवाह से पूर्व ही सभी रिश्तेदारों व आने वाले मेहमानों को शादी के कार्ड के माध्यम से यह संदेश  दिया था,की यदि आपको नव-दंपत्ति को विवाह के उपलक्ष में कुछ उपहार ही देना है तो, अपना नैत्रदान-अंगदान-देहदान का संकल्प-पत्र भरकर दूल्हे-दुल्हन को भरकर सौपें । जहाँ शहरी क्षेत्र के लोगों में अंगदान के प्रति जागरूकता का प्रतिशत बहुत कम है,वहाँ ग्रामीण क्षेत्र में नैत्रदान-अंगदान-देहदान की बात करने पर सभी ने पहले तो शादी में आने के लिये ही मना कर दिया । उनको यह भी डर था कि कहीं ऐसा न हो कि संकल्प पत्र भरने के बाद नैत्रदान-अंगदान करना जरूरी ही हो जायेगा । लोगों की ऐसी सोच के कारण ऐसा लगने लगा था कि शादी का रंग कहीं फीका न पड़ जाये । इस पर शाइन इंडिया फाउंडेशन के 5 सदस्यों की टीम मुंडियर गाँव में पहुँची, उन्होंने शादी के एक दिन पहले से गाँव के वृद्धजनों को साथ लेकर एक एक घर में जाकर नैत्रदान-अंगदान की उपयोगिता व जागरूकता के बारे में विस्तार से बताया । उसके बाद अगले दिन भी संस्था सदस्यों ने मंगल रस्मों के लिये घर-घर बुलावा भेजने के दौरान सभी को नैत्रदान-अंगदान-देहदान के पम्पलेट भी दिये । शाम को संस्था द्वारा लगाये गये शिविर में गाँव के सभी वर्ग के लोगों ने अंगदान के संकल्प पत्र भरे । क़रीब 35 से ज्यादा लोगों ने अंगदान,110 लोगों ने नैत्रदान व 3 वृद्ध जनों ने देहदान के लिये अपनी सहमति प्रदान की ।

22 जनवरी को भी गुना में सभी बारातियों ने अपने रिश्तेदारों को भी इस ने कार्य के बारे में बताया तो वहाँ भी 30 लोगों ने अपने नैत्रदान के संकल्प पत्र भरे । दूल्हे टिंकू ओझा व दुल्हन तृप्ति ने समाज के 2000 से अधिक लोगों के बीच फेरे से पहले अंगदान का संकल्प पत्र भरा । टिंकू जी का कहना था कि उनकी माँ  विद्या देवी की मृत्यु के बाद उस दुखः के माहौल से यह नेक काम ही मुझे निकाल सका है । उनकी याद में यह काम में ताउम्र संस्था के साथ मिलकर करता रहूंगा ।