Lucknow, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुंबई दौरे और वहां फिल्म जगत के लोगों तथा उद्योगपतियों से मुलाकात पर शिवसेना प्रमुख एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की तल्खी यूं ही नहीं है

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Lucknow, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुंबई दौरे और वहां फिल्म जगत के लोगों तथा उद्योगपतियों से मुलाकात पर शिवसेना प्रमुख एवं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की तल्खी यूं ही नहीं है। उन्हें योगी के दौरे में महाराष्ट्र के लिए भविष्य का छिपा आर्थिक के साथ-साथ शिवसेना का सियासी संकट भी परेशान करने लगा है। इसीलिए उन्होंने योगी पर हमला बोलकर एक बार फिर मराठी अस्मिता का कार्ड खेलने की कोशिश की है। वह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि शिवसेना के रहते कोई मराठी मानुष का रुतबा खत्म नहीं कर सकता।
दरअसल, जिस तरह यूपी में निवेश का माहौल बन रहा है और केंद्र तथा राज्य सरकार मिलकर उद्योगपतियों व फिल्म जगत से जुड़े लोगों को आकर्षित करने की मुहिम में जुटे हैं, वह अगर सफल हो गया तो महाराष्ट्र में शिवसेना की मुश्किलें बढ़नी स्वाभाविक हैं।
मुंबई और महाराष्ट्र के बारे में जानकारी रखने वाले बताते हैं कि कभी मिलों की नगरी से आज फिल्म नगरी में तब्दील मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरा महाराष्ट्र ही एक तरह से कामगारों के वर्चस्व वाला रहा। ऐसे में शिवसेना को यह खतरा लग रहा है कि यदि फिल्म इंडस्ट्री सहित अन्य उद्योग यूपी की तरफ रुख करते हैं तो वे कामगारों को रोजगार कहां से देंगे। कामगारों की नाराजगी का उन्हें राजनीतिक नुकसान होगा।
शिवसेना का सतर्क होना लाजिमी
मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी जब पहली बार मुंबई गए थे, उसी के बाद यूपी में फरवरी 2018 में इन्वेस्टर्स समिट हुई थी। इसमें अंबानी, अडानी, टाटा सहित देश के बड़े उद्योगपतियों ने आकर प्रदेश में निवेश का आश्वासन दिया था। विदेश में रहने वाले कई भारतीयों ने भी यूपी में उद्योग लगाने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें 2 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव जमीन पर उतर भी चुके हैं।
अन्य प्रस्ताव पर भी तेजी से काम चल रहा है और उद्योगपतियों की रुचि उत्तर प्रदेश में बढ़ रही है। इसे देखते हुए ठाकरे के अंदर यह भय बैठना स्वाभाविक है कि कहीं आने वाले दिनों में आर्थिक महानगरी के रुतबे पर संकट का संदेश न चला जाए। यह संकट शिवसेना के लिए सियासी समस्या भी बढ़ाएगा।
जहां तक मनसे प्रमुख राज ठाकरे की बौखलाहट का सवाल है तो उन्हें डर सता रहा है कि मराठी अस्मिता पर उद्धव ही बढ़त न बना लें, इसलिए वे भी योगी पर हमला बोल रहे हैं। राज ठाकरे की राजनीति का आधार भी मराठी मानुष ही है।
यूपी के प्रति उद्योगपतियों के झुकाव से परेशानी
फिल्म इंडस्ट्री तो एक बहाना है। मुख्य मुद्दा उद्योगपतियों का उत्तर प्रदेश और योगी के प्रति बढ़ता झुकाव है। बुधवार को जितनी बड़ी संख्या में उद्योगपतियों की मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात हुई, उसने उद्धव को राजनीतिक रूप से और परेशान कर दिया होगा।
उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित फिल्म सिटी मुंबई को कितना प्रभावित करेगी या वहां से कितने निर्माता उत्तर प्रदेश आएंगे, इसमें कितना वक्त लगेगा? यह सब तो बाद की बातें हैं लेकिन फिलहाल उद्धव इस इंडस्ट्री में काम करने वाले 60-70 प्रतिशत मराठी कामगारों को संतुष्ट करना चाहते हैं।
उन्हें बताना चाहते हैं कि एक के बाद एक कई सुविधाओं की घोषणा तथा फिल्म जगत की नामचीन हस्तियों की योगी से मुलाकात और पिछले दिनों लखनऊ दौरों से चिंतित होने की जरूरत नहीं है। शिवसेना ऐसा नहीं होने देगी। इसके लिए वह योगी ही नहीं, बल्कि भाजपा से भी टकराने को तैयार हैं।(UNA)