मध्यप्रदेश, 2 दिन में 3 बाघों की मौत

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2 दिन में 3 बाघों की मौत
उमरिया/शहडोल।जब पूरा मध्यप्रदेश  टाइगर स्टेट का दर्जा मिलनें पर खुशियां मना रहा था,तभी बांधवगढ़ से दो दिनों में तीन बाघों की मौत मायूस करने वाली थी। दो दिन में हुई दो अलग अलग घटनाओं में तीन बाघों की जान चली गयी।
पहली घटना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के कल्लवाह रेंज की है। जहां अपनी टेरिटरी छोड़ दूसरे बाघ की टेरिटरी में घुस आए T-33 नामक बाघ ने पहले बाघिन (T-362) को मारा फिर उसके 9 महीने के नर शावक को मार दिया। बाघों के इस संघर्ष में एक शावक को कोई पता नहीं चल पा रहा था,लेकिन टाइगर रिज़र्व के अमले ने शावक को खोज कर अपने कब्जे में ले लिया।
दूसरी घटना घुनघुटी रेंज के पहाड़िया गांव के पास की है,जहां नर बाघ द्वारा 9 माह के बच्चे को मार दिया गया हैl बांधवगढ़ पूरी दुनिया में बाघों की सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र है।बाघ संरक्षण के प्रयासों के चलते यहां बाघों की संख्या में अच्छी खासी वृद्धि हुई है।वर्तमान गणना में 25 से ज्यादा ऐसे बाघ है जो टाइगर रिजर्व की सीमा से सटे गांवों के आस पास अपना डेरा जमाए हुए है। बढ़ती बाघों की संख्या और इनके सीमित विचरण क्षेत्र के चलते बाघों में अक्सर अपने क्षेत्र को लेकर संघर्ष होता रहता है।
अक्सर इस संघर्ष में बाघों की जान भी चली जाती है, हाल ही में टाइगर स्टेट का दर्जा हासिल करने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती इन बढ़ते बाघों के लिए सुरक्षित विचरण क्षेत्र बनाने की है।
सीमित वन क्षेत्र के चलते बाघों के बीच टेरिटोरियल संघर्ष की घटनाएं ज्यादा हो रही है वही मानव के साथ भी इनके संघर्ष की संभावनाएं बढ़ती जा रही है।