New Delhi कोविड-19 के माहौल में लड़कियों की भूमिका पर आधारित एक प्रतियोगिता जीतकर एक दिन के लिए ब्रिटेन की उच्चायुक्त बनीं दिल्ली की बेटी चैतन्या वेंकटेश्वरन को वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली है

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New Delhi कोविड-19 के माहौल में लड़कियों की भूमिका पर आधारित एक प्रतियोगिता जीतकर एक दिन के लिए ब्रिटेन की उच्चायुक्त बनीं दिल्ली की बेटी चैतन्या वेंकटेश्वरन को वाशिंगटन यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति मिली है। वह आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिकन यूनिवर्सिटी वाशिंगटन डीसी में दाखिला लेने जा रही हैं, जहां वह अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से स्नातक की पढ़ाई करेंगी। ‘अमर उजाला’ के साथ खास बातचीत में उन्होंने बताया कि भविष्य में वह संयुक्त राष्ट्र संघ के साथ जुड़कर मानवता की सेवा करना चाहती हैं।
चैतन्या ने इस बात को साबित कर दिया है कि अगर बेटियों को भी मौका मिले तो वह आसमां छू सकती हैं। चैतन्या वेंकटेश्वरन दक्षिणी दिल्ली के वसंत विहार में माता-पिता के साथ रहती हैं। उनके पिता बैंक कर्मचारी हैं और मां गृहणी हैं। इसी वर्ष उन्होंने टैगोर इंटरनेशनल वसंत विहार से 12वीं की पढ़ाई पूरी की है। चैतन्या ने कहा कि लड़कियों को हर मुद्दे पर संजीदगी से अपनी आवाज उठानी चाहिए। अपने इरादे पूरे करने के लिए हर चुनौती का डटकर सामना करना चाहिए।
चैतन्या की मां ने उन्हें बचपन से यही सिखाया है कि शिक्षा ही एक माध्यम है, जो लड़कियों के सपनों को पूरा करने में उनकी मदद कर सकता है। उनकी मां ने उन्हें बचपन से ही संगीत, पुस्तकालय, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पुस्तक प्रदर्शनी व मेले से जोड़े रखने का प्रयास किया है। उन्हें बचपन से ही ब्रिटिश हाई कमीशन के अंदर स्थित पुस्तकालय में जाने का मौका मिला, जिस कारण उनका जीवन किताबों से जुड़ पाया है। मौजूदा समय वह तरह-तरह की ज्ञान-विज्ञान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहती हैं।
प्रस्ताव मिलने के बाद लिया अमेरिका में पढ़ाई का निर्णय
चैतन्या ने बताया कि हाल ही में उन्हें अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से छात्रवृत्ति और वहां पढ़ाई करने का प्रस्ताव मिला। इसके बाद उन्होंने वहां जाकर आगे की पढ़ाई करने का निर्णय लिया। इसके अलावा भारतीय सिविल सेवा में रहकर जमीनी स्तर पर भारत के ग्रामीण और पिछड़े इलाके के लोगों की सेवा करना भी चैतन्या को अच्छा लगता है। मौका मिला तो वह आईएएस या आईएफएस बनकर देशसेवा करना चाहती हैं।
युवाओं को सार्वजनिक सेवा के लिए आगे आना चाहिए
चैतन्या का मानना है कि युवा होने के नाते हमें आम लोगों की सेवा के लिए सबसे आगे रहने की जरूरत है। कोरोना महामारी के दौर में बीमार, वृद्ध और प्रवासियों की मदद करनी चाहिए। क्योंकि, इस समय युवा ही शारीरिक रूप से सर्वाधिक मजबूत स्थिति में हैं।(UNA)

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