New Delhi, देश में एक के बाद एक राज्यों के चुनाव में भाजपा लगातार सत्ता पर काबिज हो रही है

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New Delhi, देश में एक के बाद एक राज्यों के चुनाव में भाजपा लगातार सत्ता पर काबिज हो रही है। बिहार में हुए ताजा चुनाव में पार्टी ने जदयू के साथ मिलकर एक बार फिर सरकार बनाई। इस बार कैबिनेट में भाजपा का ही जोर चला और अधिकतर मंत्री उसी की पसंद के बने। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले कई दशकों में पहली बार बिहार सरकार में एक भी मुस्लिम मंत्री के तौर पर शामिल नहीं किया गया। हालांकि, सरकार में प्रतिनिधियों के तौर पर मुस्लिमों की यह कमी सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं है। अन्य राज्यों में भी स्थिति चिंताजनक है
AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। ओवैसी ने गुरुवार को द इंडियन एक्सप्रेस अखबार की मुस्लिम प्रतिनिधित्व की खबर को शेयर कर लिखा, “10 राज्यों में देश के 80 फीसदी मुस्लिम रहते हैं। इनमें 4 ऐसे हैं, जहां एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है। यह सारे भाजपा शासित प्रदेश हैं। इन 10 राज्यों में मुस्लिम मंत्री 2014 के पहले के मुकाबले घटकर आधे रह गए हैं। यानी 14 फीसदी भारत के पास राज्यों में सिर्फ 3.93 फीसदी मंत्री हैं।”
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क्या कहते हैं 2014 के बाद के आंकड़े?: देश की 80 फीसदी आबादी जिन 10 राज्यों में रहती है, वहां कुल मंत्रियों की संख्या 281 है। पर इनमें मुस्लिम मंत्रियों की संख्या महज 16 है। मंत्रीपरिषद में इस समुदाय का सिर्फ 5.7 फीसदी योगदान ही है, जो कि राज्यों में मुस्लिमों की आबादी का एक-तिहाई से भी कम है।
इन 10 राज्यों में से चार- असम, कर्नाटक, गुजरात और बिहार ऐसे राज्य हैं, जहां भाजपा सत्ता में है और एक भी मुस्लिम मंत्री नहीं है। वहीं, उत्तर प्रदेश इकलौता भाजपा शासित प्रदेश है, जहां मोहसिन रजा अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और एकमात्र मुस्लिम मंत्री हैं। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले सिर्फ गुजरात ही ऐसा राज्य था, जहां कोई मुस्लिम मंत्री नहीं था। 2014 से पहले इन राज्यों में मुस्लिमों की संख्या 34 हुआ करती थी।(UNA)