Patna पटना का एक शहर है दानापुर। इस शहर की एक खासियत यह है कि भारत के कई शहरों से इस शहर का रेल और सड़क संपर्क बेहतरीन है। यह ईस्ट सेंट्रल रेलवे का डिविजनल हेडक्वार्टर भी है लेकिन आज हम बात दानापुर में रेल के विकास नहीं बल्कि इसी रेलवे के ठेके पर कब्जा जमाकर मर्डरर से माननीय बने रीतलाल यादव की कर रहे हैं।

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Patna पटना का एक शहर है दानापुर। इस शहर की एक खासियत यह है कि भारत के कई शहरों से इस शहर का रेल और सड़क संपर्क बेहतरीन है। यह ईस्ट सेंट्रल रेलवे का डिविजनल हेडक्वार्टर भी है लेकिन आज हम बात दानापुर में रेल के विकास नहीं बल्कि इसी रेलवे के ठेके पर कब्जा जमाकर मर्डरर से माननीय बने रीतलाल यादव की कर रहे हैं। पटना के कोथवां गांव के रहने वाले रीतलाल यादव के नाम का सिक्का कभी रेलवे के ठेकाओं में चलता था। कभी रीतलाल यादव का खौफ इस कदर था कि रेलवे में ठेका किसी और को कभी नहीं मिल सकता था। 90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक रीतलाल यादव के नाम की तूती बोलती थी।

लालू के करीबी रह चुके रीतलाल यादव का नाम सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता सत्यानारायण सिंह की हत्या में उछला था। 30 अप्रैल 2003 को जब राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ‘तेल पिलावन-लाठी घुमावन’ रैली कर रहे थे तब इसी दिन खगौल के जमालुद्दीन चक के पास दिनदहाड़े भाजपा नेता सत्यनारायण सिंह को उनकी ही गाड़ी में गोलियों से भून डाला गया।

इस हत्याकांड में रीतलाल यादव का नाम सामने आने के बाद उन्हें डॉन के नाम से जाना जाने लगा। रीतलाल यादव इस वक्त तक मुखिया थे। इस हत्या के बाद काफी हंगामा भी हुआ था। राजद के पूर्व नेता रीतलाल यादव के गुर्गों द्वारा एक बार फिर एक शिक्षण संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रूपए रंगदारी की मांग की गई है थी। यह रंगदारी उस वक्त मांगी गई थी जब रीतलाल यादव पटना के बेऊर जेल में कैद थे।

हालांकि कहा जाता है कि इससे पहले रीतलाल यादव के आपराधिक जिंदगी की शुरुआत 90 के दशक में हो चुकी थी। बताया जाता है कि 13 सालों में ही रीतलाल यादव का साम्राज्य पटना जिले में तो फैला ही दानापुर डीवीजन से निकलने वाले हर रेलवे टेडर पर उसका और उसके गिरोह का साम्राज्य भी स्थापित हो गया। कहा जाता है कि जिसने भी उसके खिलाफ जाने की कोशिश की उसे भून डाला गया।

भाजपा नेता की हत्या के बाद रीतलाल तब और चर्चित हो गये जब उनपर चलती ट्रेन में बख्यिारपुर के पास दो रेलवे ठेकेदारों की हत्या करने का आरोप लगा। इसके बाद रीतलाल ने अपने विरोधी नेऊरा निवासी चुन्नू सिंह की हत्या छठ पर्व के समय घाट पर उस समय कर दी जब वह घाट बनवा रहे थे।

इस घटना के बाद पटना पुलिस और एसटीएफ रीतलाल के पीछे पड़ गई क्योंकि तब चुन्नू को पुलिस का मुखबिर भी माना जा रहा था। पर अपने इलाके में ‘राबीनहुड’ की छवि वाले रीतलाल की परछाई भी पुलिस तबतक नहीं पा सकी जब तक वर्ष 2010 के विधानसभा चुनाव के पूर्व उन्होंने खुद अदालत में आत्मसमर्पण नहीं कर दिया।

ऐसा नहीं है कि रीतलाल यादव का परिचय सिर्फ एक बाहुबली के तौर पर ही है उनका राजनीति करियर भी रहा है। रीतलाल यादव किसी समय राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के भी करीबी माने जाते थे। लालू ने रीतलाल को आरजेडी का महासचिव घोषित कर दिया था। रीतलाल ने 2010 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा था और बीजेपी उम्मीदवार से हारकर दूसरे पायदान पर रहे थे