Patna बिहार विधानसभा चुनाव के पहले सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) तथा विपक्षी महागठबंधन (Grand Alliance) दोनों में बराबर आग लगी हुई है।

0
107

Patna बिहार विधानसभा चुनाव के पहले सत्‍ताधारी राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) तथा विपक्षी महागठबंधन (Grand Alliance) दोनों में बराबर आग लगी हुई है। सीट शेयरिंग (Seat Sharing) के मुद्दे पर नाराज चल रहे महागठबंधन (Mahagathbandhan) में राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी (RLSP) के अध्‍यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) गुरुवार को कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं। उधर, एनडीए में लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) सुप्रीमो चिराग पासवान (Chirag Paswan) भी सम्‍मानजनक सीटों के कम पर झुकने को तैयार नहीं हैं। चिराग ने पहले से सम्‍मानजनक सीटें नहीं मिलने पर बिहार में 143 सीटों पर लड़ने का ऐलान कर रखा है। बताया जाता है कि इस मामलें में चिराग को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जितनी सीटें ऑफर की हैं, उतने से वे संतुष्‍ट नहीं हैं।

बड़ा बनता जा रहा सीटों का मसला, बड़े उलटफेर की संभवना

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले एनडीए व महागठबंधन दोनों के लिए सीटों का मसला बड़ा बनता जा रहा है। ऐसे में दोनों गठबंधनों में किसी बड़े उलटफेर की संभवना बनती दिख रही है। महागठबंधन में नाराज चल रहे उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए के नेता वेलकम कर रहे हैं तो एनडीए में नाराज चिराग के लिए भी महागठबंधन के दरवाजे खुल सकते हैं। हालांकि, दोनों नेताओं ने इसकी पुष्टि नहीं की है। वैसे, चिराग पासवान ने यह जरूर कहा है कि एनडीए में जनता दल यूनाइटेड (JDU) नहीं, बीजेपी के कारण हैं, इसलिए एनडीए में रहते हुए बिहार में जेडीयू के खिलाफ 143 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं।

सीटों को ले नतीजे पर पहुंचती नहीं दिख रही बीजेपी से वार्ता

बताया जा रहा है कि सीटों के मसले पर चिराग पासवान की बीजेपी के साथ बातचीत भी ठोस नतीजे पर पहुंचती नहीं दिख रही है। बताया जा रहा है कि बीजेपी विधानसभा चुनाव में एलजेपी को 25 से अधिक सीट नहीं दे पा रही है। बताया जाता है कि बातचीत का दौर जारी है और बीजेपी ने कुछ लचीला रूख अपनाते हुए एलजेपी को विधान परिषद की दो सीटें भी ऑफर की है। दूसरी तरफ चिराग पासवान अधिक सीटें चाहते हैं। पसंद की सीटों को लेकर भी पेंच फंसता दिख रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि क्‍या चिराग अपनी घोषणा के मुताबिक जेडीयू कि खिलाफ 143 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे? अगर ऐसा होता है तो जेडीयू एवं बीजेपी के उनके लिए रूख क्‍या होंगे?