Patna: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार बहुत कुछ नया देखने को मिल रहा है

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बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में इस बार बहुत कुछ नया देखने को मिल रहा है। भाजपा और जदयू साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, मगर लोजपा साथ नहीं है। लोजपा के अलग होने के बाद बुधवार को एनडीए ने अपनी सीट शेयरिंग के फॉर्मूले पर से पर्दा हटा दिया और भाजपा और जदयू के सीटों का ऐलान हो गया। बीजेपी और जदयू के बीच सीटों के बंटवारे के ऐलान के बाद एक चीज ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा, वह था सीटों की संख्या। बिहार की सियासत में ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब भारतीय जनता पार्टी, नीतीश की जदयू से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भले ही लोकसभा में बीजेपी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े, मगर विधानसभा में नीतीश की पार्टी जदयू ही बड़े भाई की भूमिका में होती थी, मगर इस बार पासा पलटा हुआ है।
अगर साल 2015 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दिया जाए तो बिहार की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी और जदयू साथ में ही रही है। 2015 में सिर्फ जदयू और राजद का महागठंधन बना था, क्योंकि 2013 में बीजेपी के पीएम पद के दावेदारी के लिए मोदी के नाम पर मुहर लगने के बाद 17 साल का साथ छोड़कर जदयू एनडीए से अलग हुई थी। बहरहाल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में भारतीय जनता पार्टी को जहां 121 सीटें मिली हैं, वहीं जदयू को 122 सीटें। मगर यहां जदयू के 122 सीटों में से सात सीटें जीतन राम मांझी की पार्टी हम को दी भी जाएंगी। इस तरह से इस चुनाव में जदयू कुल 115 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
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वहीं, भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो भाजपा के 121 सीटों में से कुछ सीटें सन ऑफ मल्लाह यानी मुकेश सहनी की वीआईपी को दी जाएंगी। हालांकि, यह साफ नहीं है कि कितनी सीटें दी जाएंगी, मगर राजनीतिक पंडितों का मानना है कि वीआईपी को तीन-चार से अधिक सीटें मिलती नहीं दिख रही हैं। कुछ राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि बीजेपी अपने सिंबल से ही वीआईपी के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ा सकती है। कुल मिलाकर 243 सीट पर एनडीए के सीट शेयरिंग फॉर्मूले को देखा जाए तो बीजेपी की सीटों की संख्या जदयू से ज्यादा है।
बिहार की सियासत में साल 2005 में नीतीश की जदयू और बीजेपी ने पहली बार मिलकर चुनाव लड़ा था। बिहार चुनाव 2020 से पहले जदयू और बीजेपी तीन बार मिलकर चुनाव लड़ चुकी है। सबसे पहले फरवरी 2005 में बिहार विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में 243 सीटों में से जदयू 138 सीटों पर लड़ी थी, जबकि बीजेपी 105 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। उस साल किसी को निर्णायक बहुमत न मिलने और लोजपा के किंग मेकर बनने से राष्ट्रपति शासन लग गया, जिसकी वजह से अक्टूबर में फिर चुनाव हुए।(UNA)