Patna , Bihar Election 2020: अशोक चौधरी को बिहार प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर जदयू ने कई सवालों के जवाब एक साथ दे दिए हैं। मुख्य बात यह है कि पार्टी को एक ऊर्जावान नेता की जरूरत थी, जो प्रदेश अध्यक्ष के अस्वस्थ होने और उनकी उम्रजनित अन्य परेशानियों की वजह से अटके पड़े काम को आगे बढ़ा सके।

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Patna , Bihar Election 2020: अशोक चौधरी को बिहार प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर जदयू ने कई सवालों के जवाब एक साथ दे दिए हैं। मुख्य बात यह है कि पार्टी को एक ऊर्जावान नेता की जरूरत थी, जो प्रदेश अध्यक्ष के अस्वस्थ होने और उनकी उम्रजनित अन्य परेशानियों की वजह से अटके पड़े काम को आगे बढ़ा सके। संगठन और सरकार दोनों का अनुभव रखने वाले अशोक चौधरी इसके लिए उपयुक्त व्यक्ति माने गए। साथ ही चुनाव के समय जदयू ने श्याम रजक जैसे नेताओं की ओर से उठाए गए उन सवालों का जवाब भी दे दिया है, जो अनुसूचित जाति को पार्टी में महत्व नहीं मिलने से जुड़े थे।
पहली बार अनुसूचित जाति के नेता को शीर्ष जिम्‍मेदारी
यह पहला मौका है, जब जदयू में अनुसूचित जाति के किसी नेता को संगठन में शीर्ष जिम्मेदारी दी गई है। चुनाव में इस पर खूब चर्चा होगी यह तय है। राजद में जाने की तैयारी में लगे श्याम रजक को जब जदयू ने बर्खास्त किया था, तो उन्होंने कहा था कि हाशिये की आबादी को जदयू में सम्मान नहीं है। तब जदयू नेताओं ने इस वर्ग से आने वाले उन नेताओं का जिक्र किया था, जो नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री हैैं। इस क्रम में अशोक चौधरी के साथ-साथ संतोष निराला, महेश्वर हजारी और रामजी ऋषिदेव के नाम लिए गए थे।
अशोक चौधरी के नेतृत्व में इन मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा था कि नीतीश कुमार ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के लिए जितना किया उतना किसी अन्य मुख्यमंत्री ने नहीं किया। ऋषिदेव ने तो यहां तक कहा कि उनके समाज की आने वाली पीढिय़ां याद रखेंगी कि नीतीश कुमार ने उनके लिए क्या किया। महेश्वर हजारी को श्याम रजक की जिम्मेदारी वाले उद्योग विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। आज अशोक चौधरी को प्रदेश में पार्टी का शीर्ष पद सौंप दिया गया।

चुनाव में चर्चा तय है,अशोक चौधरी को जदयू का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा पिछले कई महीनों से थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के ठीक पहले जदयू ने इसकी घोषणा की। इस निर्णय की चर्चा तो हर हाल में चुनावी सभाओं में होगी। नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले अशोक चौधरी हाल में जदयू की ओर से आयोजित वर्चुअल रैलियों को सफल बनाने में सक्रिय रहे। वह कांग्रेस से जदयू में शामिल हुए थे। बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष और महागठबंधन की सरकार में शिक्षा मंत्री के रूप में उनके अनुभव और कामकाज को देखते हुए जदयू में उन्हें शुरू से ही अहम जिम्मेदारी मिलती रही है।