एससी-एसटी कोर्ट ने अंकुर पाडिय़ा की फांसी की सजा रखी बरकरार

कोटा। बहुचर्चित रूद्राक्ष अपहरण और हत्याकांड के मुख्य आरोपी अंकुर पाडिय़ा को बुधवार को भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच कोटा न्यायालय में पेश किया गया। जहां एससी-एसटी कोर्ट ने अंकुर पाडिय़ा की याचिका को खारिज करते हुए फांसी की सजा बरकरार रखी।

रूद्राक्ष हत्याकांड को लेकर पूर्व में एससी-एसटी कोर्ट ने 7 साल के मासूम बच्चे का अपहरण कर हत्या के मामले के मुख्य आरोपी अंकुर पाडिय़ा को फांसी की सजा सुनाई थी। उसके भाई अनूप पाडिय़ा को आजीवन कारावास की सजा से दण्डित किया था। इस मामले में अंकुर पाडिय़ा के वकील ने हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए शिक्षत व जेल में सवाजसेवी कार्यों व अच्छे आचरण के आधार पर फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील करने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने सितम्बर माह में अंकुर पाडिय़ा की फांसी की सजा को रद्द करते हुए निचली अदालत को तीन महीने में सुनवाई कर पुन: आदेश जारी करने क आदेश दिए थे।

लेकिन एससी एससी कोर्ट ने तीन माह पूरे होने से पहले ही रूद्राक्ष हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए अंकुर पाडिय़ा के फांसी की सजा बरकरार रखा। बुधवार को रूद्राक्ष के पिता पुनीत हांडा अपने परिवार सहित कोर्ट में पहुंचे। दोपहर करीब 3 बजे अनुप पाडिय़ा को भारी सुरक्षा बंदोबस्त के बीच न्यायालय में पेश किया गया। जैसे ही न्यायालय ने आरोपी अंकुर पाडिय़ा की फांसी की सजा बरकरार करने के आदेश दिए बाहर खड़े रूद्राक्ष के पिता पुनीत हांडा के आंखों में आंसु आ गए और एक बार फिर अपने बच्चे को न्याय दिलाने में कामयाब की खुशी उनके चेहरे पर देखी गई।

पीडि़त पिता पुनीत हांंडा ने फैसला आने के बाद कहा कि न्यायालय पर पूरा विश्वास था। अपने बेटे को न्याय दिलाने के लिए आरोपी जिन अदालतों में जहां भी अपील करेगा वहां तक न्याय की लड़ाई लडूंगा और जिस भी न्यायालय में जाएगा वहां आरोपी अंकुर पहाडिया को फांसी की सजा मिलेगी।

यह है मामला

9 अक्टूबर 2014 की रात को मासूम रुद्राक्ष का आरोपी अंकुर पाडिय़ा ने तलवंडी के हनुमान पार्क से अपहरण किया था। उसके बाद वो उसे लेकर जगह-जगह घूमता रहा और परिजनों से तीन करोड़ों रुपयों की फिरौती मांगता रहा। आरोपी ने अलसुबह नांता से जाखमुंड की तरफ जा रही नहर में फेंककर रुद्राक्ष की हत्या कर दी। इस मामले को लेकर पूरा शहर आक्रोशित हो गया था। उस समय के तत्कालिन एडीजी क्राईम अजीत सिंह ने कोटा में ही कैम्प किया था।