Ranchi पत्नी की याद में पहाड़ चीर देने वाले बिहार के गया जिले के दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता, कुछ उन्हीं की तरह झारखंड के मांझी समाज के धनंजय कुमार अपनी गर्भवती पत्नी सोनी हेम्बरम को डिलेड (डि.ईएल.ईएड) द्वितीय वर्ष की परीक्षा दिलाने के लिए स्कूटी से ग्वालियर के पद्मा कन्या विद्यालय पहुंच गए।

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Ranchi पत्नी की याद में पहाड़ चीर देने वाले बिहार के गया जिले के दशरथ मांझी को कौन नहीं जानता, कुछ उन्हीं की तरह झारखंड के मांझी समाज के धनंजय कुमार अपनी गर्भवती पत्नी सोनी हेम्बरम को डिलेड (डि.ईएल.ईएड) द्वितीय वर्ष की परीक्षा दिलाने के लिए स्कूटी से ग्वालियर के पद्मा कन्या विद्यालय पहुंच गए। धनंजय झारखंड के गोड्डा जिले के गांव गन्टा टोला के रहने वाले हैं।

गोड्डा जिला बांग्लादेश की सीमा से बमुश्किल 150 किलोमीटर दूर है। धनंजय ने करीब 1176 किमी स्कूटी चलाई और झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न् पहाड़ी-मैदानी रास्तों को पार करते हुए मप्र के ग्वालियर पहुंचे। दंपती ने ग्वालियर में ठहरने के लिए दीनदयाल नगर में 1500 रुपये में 10 दिन के लिए कमरा किराए पर लिया है। 11 सितंबर को परीक्षाएं संपन्ना होने के बाद यह दंपती वापस स्कूटी से ही झारखंड के लिए रवाना होंगे।

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धनंजय का कहना है कि सोनी छह महीने की गर्भवती है, दिसंबर माह में प्रसव होने की उम्मीद है। परीक्षा देना जरूरी था, लेकिन ट्रेन बंद हैं व किराये के वाहन से आने में करीब 30 हजार रुपये का खर्चा आ रहा था। ऐसे में दोनों ने तय किया कि दोपहिया वाहन से ही यह सफर तय किया जाए। 28 अगस्त को धनंजय व सोनी अपने गांव से निकले और 30 अगस्त को रुकते-रुकते ग्वालियर पहुंच गए। ‘नईदुनिया संवाददाता ने जब सोनी से पूछा कि गर्भावस्था के बावजूद इतनी परेशानी झेलना क्यों चुना? तो सोनी ने अपनी कोख पर हाथ रखा और मुस्कुरा कर कहा ‘इसी के लिए तो सब कर रहे हैं। भाग्यशाली हूं, जो इतना प्यार करने वाला पति मिला।”