Ranchi राज्य में बिना खतियान के नक्शों को स्वीकृति नहीं दी जायेगी. नगर विकास विभाग ने सभी निकायों के नगर आयुक्तों, नगर परिषद व नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के सचिवों को इससे संबंधित पत्र भेजा है.

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Ranchi राज्य में बिना खतियान के नक्शों को स्वीकृति नहीं दी जायेगी. नगर विकास विभाग ने सभी निकायों के नगर आयुक्तों, नगर परिषद व नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारियों और क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के सचिवों को इससे संबंधित पत्र भेजा है. कहा गया है कि राज्य में लागू बिल्डिंग बाइलॉज के मुताबिक नक्शा स्वीकृति के लिए म्यूटेशन रसीद व रजिस्टर्ड सेल डीड के साथ संबंधित भूमि का खतियान अनिवार्य है.
इन तीनों कागजातों को प्रस्तुत किये बिना नक्शों को स्वीकृति नहीं प्रदान की जा सकती है. रांची क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (आरआरडीए) ने मामले में राज्य सरकार से दिशा-निर्देश मांगा था. आरआरडीए का कहना था कि इन कागजातों की अनिवार्यता के कारण कई तरह की परेशानी हो रही है.

खतियान फटा होने, म्यूटेशन रिकार्ड व सेलडीड के आधार पर सीएनटी एक्ट की जमीन की बिक्री पूर्व में सामान्य जाति का होने, खतियान में गैर मजरूआ भूमि दर्ज होने और सामान्य जाति के नाम से नक्शा जमा करने जैसे मामलों में नक्शों को स्वीकृति संभव नहीं हो रही है.
आरआरडीए ने खतियान की अनिवार्यता खत्म करने का किया था सरकार से आग्रह
सरकार को महाधिवक्ता ने भी दी सलाह कहा नक्शा के लिए खतियान अनिवार्य

आरआरडीए ने केवल म्यूटेशन और रजिस्टर्ड डीड के आधार पर नक्शों को स्वीकृति देने का आग्रह किया था. इसके बाद राज्य सरकार ने मामले में महाधिवक्ता की सलाह मांगी थी. महाधिवक्ता ने बिल्डिंग बाइलॉज और सीएनटी एक्ट के प्रावधान की व्याख्या के बाद नक्शा पास करने के लिए रजिस्टर्ड डीड, म्यूटेशन और खतियान का होना आवश्यक बताया. महाधिवक्ता की सलाह मिलने के बाद आरआरडीए का आग्रह ठुकराते हुए सभी निकायों व क्षेत्रीय विकास प्राधिकारों को इसकी सूचना देते हुए निर्देशित किया गया है.

आरआरडीए ने जमीन के मालिकाना हक को न्यायालय का मामला बताया था
आरआरडीए ने कहा था कि जमीन का मालिकाना हक व्यवहार न्यायालय से संबंधित मामला है. मूलत: नक्शों की जांच, मास्टर प्लान, शहरी प्रबंधन व विकास आदि विषयों पर तथ्यपरक विचार से संबंधित है. जमीन के मालिकाना हक की जांच करने के बाद ही जमीन का म्यूटेशन किया जाता है. आरआरडीए को मालिकाना हक तय करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है. ऐसे में पूर्व में तय नियमों पर पुर्नविचार करने के बाद केवल म्यूटेशन के आधार पर तकनीकी पदाधिकारियों द्वारा नक्शों की तकनीकी जांच के बाद स्वीकृति दी जानी चाहिए.