Ranchi: राज्य सरकार अगर राजी हो तो झारखंड में पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों में 36 फीसदी आरक्षण मिल सकता है

0
9

राज्य सरकार अगर राजी हो तो झारखंड में पिछड़ा वर्ग समुदाय से आने वाले लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों में 36 फीसदी आरक्षण मिल सकता है। झारखंड में पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग ने इसकी अनुशंसा की है। आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए इसे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दिया है। आयोग ने राज्य सरकार को पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में अधिकतम 50 फीसदी सीट तक आरक्षित रखने की छूट दी है। झारखंड में पिछड़ा वर्ग से आने वाले लोगों को सरकारी नौकरियों में अभी 14 फीसदी आरक्षण मिलता है। झारखंड में पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग जल्दी ही इसके बारे में विस्तृत प्रतिवेदन राज्य सरकार को भेजेगा। आयोग की ओर से विभिन्न राज्यों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण के लिए किए गए प्रावधानों की प्रति भी राज्य सरकार को भेजी जाएगी। इसके अलावा आरक्षण सीमा को कुल 50 फीसदी से अधिक बढ़ाने के राज्य सरकार के अधिकार के बारे में भी मुख्यमंत्री कार्यालय को अवगत कराया जाएगा। आयोग ने यह फैसला सदान मोर्चा के आवेदन पर सुनवाई के बाद किया है। मोर्चा की ओर से झारखंड में पिछड़े वर्गों की आबादी 56 फीसदी होने का दावा किया गया था। इसी अनुपात में सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग की गई थी। अति पिछड़ा को 24 फीसदी, पिछड़ा को 12 फीसदी : पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग का मानना है कि प्रदेश में अति पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-1 की आबादी पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-2 से अधिक है। इसलिए अति पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-1 को 24 फीसदी और पिछड़ा वर्ग यानी एनेक्सचर-2 को 12 फीसदी आरक्षण झारखंड सरकार कम से कम दे। आयोग ने अपनी अनुशंसा में तमिलनाडु में आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया है। तमिलनाडु के मामले में  सर्वोच्च न्यायालय ने जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने का फैसला दिया है। झारखंड में हो जाएगा 82 फीसदी आरक्षण : पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग की अनुशंसा को अगर झारखंड सरकार मानती है तो झारखंड की सरकारी नौकरियों में कुल आरक्षण 82 फीसदी हो जाएगा। अभी तक झारखंड में अनुसूचित जाति को 10 फीसदी, अनुसूचित जनजाति को 26 फीसदी, अत्यंत पिछड़ा वर्ग को आठ फीसदी,पिछड़ा वर्ग को छह फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को 10 फीसदी आरक्षण है। ये कुल मिलाकर 60 फीसदी हो गए। पिछड़े वर्ग के लिए 14 फीसदी की जगह 36 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने से सरकारी नौकरियों में कुल आरक्षण 82 फीसदी हो जाएगा। विस्तृत प्रतिवेदन जल्दी संबंधित विभागों को भेजा जाएगा : पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग के चेयरमैन न्यायमूर्ति लोकनाथ प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार की नौकरियों में पिछड़े वर्ग को कम से कम 36 फीसदी आरक्षण देने की अनुशंसा राज्य सरकार से की है।  तमिलनाडु के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद इसमें कोई बाधा नहीं है। इससे संबंधित विस्तृत प्रतिवेदन भी जल्दी ही संबंधित विभागों को भेज दिया जाएगा।
अभी यह है आरक्षण
अनुसूचित जातिः 10 फीसदी
अनुसूचित जनजातिः 26 फीसदी
अत्यंत पिछड़ा वर्ग(एनेक्सचर-1)- 08 फीसदी
पिछड़ा वर्ग(एनेक्सचर-2)-06 फीसदी
आर्थिक रूप से कमजदोर वर्गः 10 फीसदी
कुलः 60 फीसदी
आगे यह मिलेगा आरक्षण
अनुसूचित जातिः 10 फीसदी
अनुसूचित जनजातिः 26 फीसदी
अत्यंत पिछड़ा वर्ग(एनेक्सचर-1)- 24 फीसदी
पिछड़ा वर्ग(एनेक्सचर-2)-12 फीसदी
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गः 10 फीसदी
कुलः 82 फीसदी
राज्य़ सरकार पर है दारोमदार : पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग की ओर से कम से 36 फीसदी आरक्षण की अनुशंसा पर मुहर लगाने का दारोमदार अब राज्य सरकार पर है। राज्य सरकार अगर तैयार होती है तो उस पर राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी लेनी होगी। उसके बाद झारखंड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए विधानसभा में ले जाना होगा। वहां से पारित होने के बाद पिछड़े वर्गों के लिए सरकारी नौकरियों में 36 फीसदी आरक्षण लागू हो जाएगा।
आरक्षण लागू करने से पहले ये करना होगा
1. राज्य में पिछड़ी जातियों का सर्वेक्षण करा कर उनकी आबादी का पता करना होगा।
2. पिछड़ी जाति के लोगों की राज्य सरकार की नौकरियों में कितनी हिस्सेदारी है, इसका सर्वेक्षण कराना होगा।
ये है बाधा
3. राज्य का बड़ा हिस्सा अनुसूचित क्षेत्र के तहत आता है।उन इलाकों में अनुसूचित जनजाति को जिला स्तर की नौकरियों में प्राथमिकता देने का प्रावधान है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि उन इलाकों में क्या करेगी।
4. रघुवर राज में की थी 27 फीसदी की अनुशंसा
5. पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग ने रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहते 27 फीसदी आरक्षण की अनुशंसा की थी। उस समय पिछड़ी जातियों के सर्वेक्षण का आदेश मुख्यमंत्री ने दिया था। जो परवान नहीं चढ़ सका।(UNA)