Ranchi सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में उठा विवाद शनिवार को भी जारी रहा। झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहू जामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सीता सोरेन ने शनिवार को ट्वीट कर अपनी बेटियों की हिम्मत और सोच की सराहना की।

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Ranchi सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) में उठा विवाद शनिवार को भी जारी रहा। झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहू जामा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सीता सोरेन ने शनिवार को ट्वीट कर अपनी बेटियों की हिम्मत और सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेटियों के जोश और जुनून को देखकर मेरी हिम्मत और ताकत दोगुनी हो गई है। हमसे हमारा हक और मान-सम्मान कोई नहीं छीन सकता।

ट्वीट में सीता सोरेन ने लिखा कि ‘मेरी बेटियों को भी राजनीतिक रूप से अच्छाई और बुराई की समझ हो चुकी है। हक की लड़ाई का जज्बा इनके आंदोलनकारी खून में है। इनमें भी अपने दादा शिबू सोरेन और पिता स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की तरह वही जोश, वही जुनून है। इनके जोश और जुनून को देखकर मेरी हिम्मत और ताकत दोगुनी हो गई है। हमसे हमारा हक और मान-सम्मान कोई नहीं छीन सकता।’

उल्लेखनीय है कि सीता सोरेन ने झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन से पार्टी महासचिव विनोद पांडेय के खिलाफ साजिश रचने की शिकायत दो दिन पहले पार्टी के अध्यक्ष और अपने श्वसुर शिबू सोरेन से की थी। इसके बाद से उन्होंने अपने तेवर तल्ख कर रखे हैं। उनकी दो बेटियों ने भी उनका समर्थन करते हुए अबतक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने को दुखद बताया।

ट्विटर पर इसे लेकर सीता सोरेन समेत उनकी बेटियां विजयश्री सोरेन और राजश्री सक्रिय रहीं। अभी तक झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन ने बहू के पत्र का कोई जबाव नहीं दिया है। उधर, मुख्यमंत्री हेमंत सारेन की ओर से भी अपनी विधायक भाभी की तल्ख टिप्पणी का कोई जबाव नहीं दिया जा रहा है। सीता सोरेन इससे पहले भी कई बार अलग-अलग मुद्दों पर बगावती रुख अख्तियार कर चुकी हैं।

माना जा रहा है कि दुमका उपचुनाव के नजदीक आने के कारण जो राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हैं, उनमें सीता सोरेन खुद को उपेक्षित महसूस कर रही हैं। वहीं, राजनीतिक उत्तराधिकार की सुगबुगाहट और लड़ाई भी अब धीरे-धीरे सतह पर आती दिख रही हैं। इतना तो स्पष्ट है कि सीता सोरेन के रुख से झारखंड मुक्ति मोर्चा का शीर्ष नेतृत्व सकते में है। फिलहाल झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन नई दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं। झामुमो में फिलहाल कोई भी इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है।