UP: समाजवादी पार्टी ने निर्वाचन आयुक्त से की रामपुर उपचुनाव निरस्त कर पुनर्मतदान की मांग

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, नई दिल्ली को पत्र लिखकर रामपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में हुए उपचुनाव-2022 को निरस्त कर पुनः मतदान कराने की मांग की है।
   
रामगोपाल यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार को लिखे पत्र में कहा है कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में हुए मतदान में शासन द्वारा बड़े पैमाने पर धांधली कराई गई है। वोटरों को मतदान से रोका गया। पुलिस की बर्बरता से कई लोग घायल हुए।

उन्होंने पुलिस की बर्बरता के फोटो भी प्रमाण में संलग्न किए हैं। उन्होंने कहा है कि रामपुर में इस बार मतदान का प्रतिशत पिछले चुनावों की तुलना में काफी कम है। इसलिए रामपुर विधानसभा क्षेत्र में पुनः मतदान कराया जाना चाहिए।      

वहीं, विधानसभा में समाजवादी पार्टी के मुख्य सचेतक मनोज कुमार पाण्डेय ने कहा है कि मैनपुरी लोकसभा और रामपुर, खतौली विधानसभा तीनों क्षेत्रों के हुए उपचुनाव में लोकतंत्र की हत्या हुई है। रामपुर में जो हुआ वह तो अन्याय की पराकाष्ठा है। पुलिस ने लोगों को मताधिकार से न केवल वंचित किया अपितु जाति-धर्म देखकर लोगों को मारा पीटा भी, जिससे बड़ी संख्या में लोग घायल हुए है। बड़ी संख्या में लोगों को मतदान केन्द्रों से डरा धमकाकर वापस घर भेज दिया गया। जिसके चलते रामपुर उपचुनाव में मतदान का प्रतिशत बहुमत कम रहा। उन्होंने निर्वाचन आयोग समेत सभी संवैधानिक संस्थाओं से मांग की है कि रामपुर के उपचुनाव की जांच कर निर्णय ले और लोकतंत्र को बचाने का काम करें।

मनोज पाण्डेय आज यहां पार्टी मुख्यालय लखनऊ में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आज यूपी में किसान की फ़सल की खरीद नही हो रही है और सरकार का डाटा भी यही बता रहा है। किसान की फसल पर बिचौलियों का कब्ज़ा है। किसान को डीएपी और यूरिया की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। गांव में बिजली नहीं और नहर में पानी नहीं। डेंगू के इलाज में लोगों के जेवर तक बिक गए हैं। इन सभी मुद्दों पर सदन में चर्चा होनी थी लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसा होने नहीं दिया।

पाण्डेय ने कहा कि सरकार ने कैबिनेट के फैसले से तीन दिन के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया था। विधानसभा की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी 5, 6 व 7 दिसम्बर को सत्र चलने की स्वीकृति हुई थी। लेकिन सरकार ने दूसरे दिन ही अचानक सदन स्थगित कर दिया। सदन में जनसमस्याओं और जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी थी। सदस्यों के द्वारा तमाम प्रश्न लाये गए थे। यह सरकार हर विषय पर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। संविधान नहीं मान रही है। सरकार चाहती है कि सदन न चलाना पड़े। इस विधानसभा के गठन के 9 महीने हो गए। अभी तक विधानसभा की समितियों का गठन नहीं हुआ है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण लोक लेखा समिति होती है, जिसका कार्य सरकारी महकमों के खर्चों का लेखा जोखा जांचना होता है।

पाण्डेय ने कहा कि भाजपा सरकार का संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इतने समय तक कमेटी का गठन नही हुआ। लोकतंत्र के सबसे बड़े अधिकार मतदान से लोगों को वंचित किया गया। निष्पक्ष चुनाव की मांग पर लोगों को लाठी डंडे से पीटा गया।

कानपुर के विधायक इरफ़ान सोलंकी, जो चार बार से विधायक हैं, उन्हें एक फर्जी घटना में फसाया जाता है। उस मामले में एक महिला और कानपुर विकास प्राधिकरण का विवाद चल रहा था उस मामले में इरफ़ान सोलंकी और उनके भाई को फंसा दिया जाता है। सीसीटीवी में भी देखा गया कि घटना के समय इरफान सोलंकी या उनके परिवार का कोई भी सदस्य घटनास्थल पर मौजूद नही था। दबिश के नाम पर इरफ़ान की पत्नी और उनके बच्चों को परेशान किया गया। उन लोगों को अपमानित किया गया।            

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