Simanchal, पहचान भुखमरी, बेशुमार गरीबी, पलायन मगर चुनावी मुद्दा बस लालू का बेटा (तेजस्वी यादव) बनाम प्रधानमंत्री मोदी

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Simanchal, पहचान भुखमरी, बेशुमार गरीबी, पलायन मगर चुनावी मुद्दा बस लालू का बेटा (तेजस्वी यादव) बनाम प्रधानमंत्री मोदी। चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक पहले सीमांचल के चारों जिलों में सियासी फिजा अचानक बदल गई। चुनाव प्रचार खत्म होते ही समूचे सीमांचल में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की साफ-साफ लकीर खिंच गई।
शुरुआती दौर में सीमांचल के चार जिलों कटिहार, पूर्णिया, अररिया, किशनगंज में बेरोजगारी, पलायन जैसे मुद्दे को मजबूती मिली थी। स्थानीय विधायक का कामकाज भी मुद्दा बना था। कई सीटों पर बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा हावी था। हालांकि आखिरी दौर में पिछले दो-तीन दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार, योगी आदित्यनाथ और राजनाथ सिंह की ताबड़तोड़ रैलियों के बाद देखते-देखते सारे मुद्दे हवा हो गए। स्थिति यह है कि नीतीश कुमार सहित जदयू के सभी स्टार प्रचारक भी बस मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
सीमांचल में मुसलमानों की हिस्सेदारी करीब साठ फीसदी है। यह बिरादरी एनआरसी और सीएए जैसे मुद्दों पर बुरी तरह आशंकित है। इनमें एक संदेश साफ है। तेजस्वी की सरकार आने पर बिहार में सीएए और एनआरसी लागू नहीं होगा। दिलचस्प तथ्य यह है कि शैक्षणिक रूप से बेहद पिछड़े सीमांचल में अल्पसंख्यकों के एक बड़े वर्ग को तेजस्वी यादव का नाम नहीं पता। पूर्णिया के बायसी विधानसभा के डगरुआ की सकीना खातून कहती हैं, उन्हें लालू का बेटा पसंद है। कदवा विधानसभा के कुरुम के पूर्व मुखिया मोहम्मद तनवीर कहते हैं यहां उम्मीदवार को नहीं सीएम बनाने के लिए मतदान होगा।
अचानक बदला मिजाज
बीते सप्ताह तक सीमांचल के बायसी, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन, बहादुरगंज सीट पर एआईएमआईएम उम्मीदवारों का जबर्दस्त प्रभाव दिख रहा था। इसी प्रकार बरारी और कदवा में कांग्रेस के उम्मीदवार बाहरी होने के आरोपों से हलकान थे। इसी प्रकार कई सीटों पर भाजपा-जदयू के स्थानीय विधायक विकास के सवाल पर हलकान थे। हालांकि इसी दौरान कई रैलियों के बाद मुद्दा मोदी बनाम तेजस्वी हो गया।
समानांतर ध्रुवीकरण
सीमांचल की ऐसी सीटों पर अचानक समानांतरण ध्रुवीकरण का भी संकेत मिला जहां हिंदू आबादी अल्पमत में है। पहले बलरामपुर, कदवा, प्राणपुर, किशनगंज, सहित डेढ़ दर्जन सीटों पर हिंदू मतों में बिखराव के संकेत थे, मगर अब यह मतदाता वर्ग राजग के समर्थन में खड़ा दिखता है। कदवा, बरारी जैसी कुछ सीटों पर जहां जदयू के उम्मीदवार कमजोर हैं, वहां के हिंदू मतदाता भाजपा के बागी हुए लोजपा उम्मीदवारों के पक्ष में गोलबंद होने का साफ संदेश दे रहे हैं।
बहुकोणीय मुकाबले से मिलता है भाजपा को लाभ
सीमांचल में बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति में इसका लाभ भाजपा को मिलता है। बीते चुनाव में करीब त्रिकोणात्मक जंग न होने के कारण भाजपा को सीमांचल में महज छह सीटें ही हासिल हुई थी। उस चुनाव में जदयू को तीन, कांग्रेस-राजद को 14 और सीपीआई माले को एक सीट हासिल हुई थी।(UNA)