Uttar Pradesh: महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर बात

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हम बात कर रहे हैं महिलाओं की सुरक्षा के विषय पर और बात जब महिलाओं की सुरक्षा के संदर्भ में हो हीं रही है तो मैं आपको बताते चलुं , हमारे यहां एक बड़ी हीं प्रसिद्ध कहावत है के “यत्र नार्यास्तु पुज्यनते रमन्ते तत्र देवता ” अर्थात जहां नारियों को पूजा जाता है वहां देवता निवास करते हैं. भारत एक ऐसा देश जहां नारीयों को देवी का दर्जा दिया गया है, जहां नवरात्र के महिने में कन्या भोज कराया जाता है, जहां नारियों को पुरूष की जननी कहा जाता है मगर ये सब बस कहा जाता है क्या माना भी जाता है ? नहीं नहीं माना जाता और जब माना ही नहीं जाता तो क्या फायदा ऐसी रिति- रिवाजों का, कथाओं का. एक ओर हम नारियों की पूजा करते हैं वहीं दूसरी ओर कोई वहशी भेंडिया उनका जिस्म नोच रहा होता है.
आए दिन लड़कियों के साथ ऐसिड हमले, घरेलू हिंसा,यौन उत्पीडन और बलात्कार जैसी खबरें आती रहती हैं सुबह अखबार उठाओ तो इन्हीं खबरों से दिन की शुरुआत होती है मन  विचलित हो उठता है ऐसी खबरें पढ़कर व सुनकर बेटियां अगर घर से पल भर के लिए भी ओझल हो जांए तो मां का सब्र टुटने लगता है, पिता की आंखें  दरवाजे पर टकटकी लगाए रहती है  एक चिंता सताते रहती है के उनकी बचची ठीक भी होगी या नहीं.
अब आते हैं कानुनों पर:
तो ऐसा नहीं है के भारत में
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानून नहीं है अगर हम गौर करें तो ऐसे कानुनों की लंबी फेहरिस्त मिल जाएगी आपको:
◆ चाइल्ड मैरिज एक्ट -1929
◆ स्पेशल मैरिज एक्ट-1954
◆ हिन्दू मैरिज एक्ट-1955
◆ इंडियन डाइवोर्स एक्ट-1969
◆ मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट-1861
◆ हिन्दू रिमैरेज एक्ट-1856
◆ सेक्सुअल हैरेसमेंट एट वर्किंग प्लेस एक्ट-2013
इसके अलावे हम गौर करें तो अब 16 से 18 साल के किशोर भी जघन्य अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं तो संविधान में उनके लिए भी कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान है मतलब जुबेनाइल कानुनों  में भी तब्दीली की गई है.
आंकड़ों की बात करें तो एनसीआरबी के 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में  महिलाओं के खिलाफ अपराध पिछले साल की तुलना में 7.3फिसद तक बढ़ गये हैं.
सुनकर काफी हैरानी होगी 1सर्वे में भारत को महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे असुरक्षित स्थान बताया गया है,थामसन रायटर्स के सर्वे में  अफगानिस्तान इस मामले में 2, सीरिया ३,सौदी अरब 4 व भारत शिर्ष पर है यह बहुत चिंता का विषय है. अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की के साथ जो घटना घटी और उसमें परिवार वालों को न्याय दिलाने की जगह  सरकार व पुलिस प्रशासन द्वारा मामले में की गई लिपापोती  हमारे सिस्टम की काफी डरावनी तस्वीर पेश करती है.
अकेले हाथरस नहीं UP, MP, राजस्थान, रांची, छत्तीसगढ़ लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं और ऐसा भी नहीं है अकेले हाथरस हैवानियत की गवाह बना इसी दरम्यान  तमाम जगहें ,राज्य,शहर भी मैला हुआ हालांकि उसकी चर्चा नहीं हुई. मैं  इसपर सरकार की निंदा करती हूं साथ हीं  सरकार के ओर से कड़े रुख का इंतजार करती हूं ताकि बेटियों को न्याय मिले  और वे खौफ के साए में नहीं आज़ादी के उजाले में स्वतंत्र व इतमिनान से अपनी जिंदगी गुजारें.(UNA)